दिल्ली ब्लास्ट का आरोपी आतंकी और ब्लास्ट के बाद के हालात।  
दिल्ली

सहारनपुर में एक शादी में बना था आतंकियों का यह ग्रुप, अगले दिन से ही मॉड्यूल ने शुरू कर दिया था काम

Delhi Blast Terrorist Group: दिल्ली कार ब्लास्ट में आतंकी साजिश ही है। यह अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। इसकी पूरी साजिश 4 अक्तूबर को सहारपुर में एक शादी में रची गई थी।

रंजन कुमार

Big Revelation in Delhi Blast: दिल्ली में लाल किला के पास सोमवार शाम हुए धमाके के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का हाथ है। इस मॉड्यूल में डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य थे। ये सभी पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। सुरक्षा जांच एजेंसियों की जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और यूपी के सहारनपुर समेत कई इलाकों से जुड़ा था। इस ग्रुप की शुरुआत इस कार विस्फोट से 37 दिन पहले 4 अक्टूबर को हुई थी। यह पूरा ग्रुप सहारनपुर में एक शादी में मिला था। इसके बाद इन लोगों ने फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर, हथियार, विस्फोटक और फंडिंग के नेटवर्क तैयार करना शुरू किया।

शादी में आए थे कुछ खास मेहमान

19 अक्टूबर को सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर में जैश के पोस्टर दिखने से मॉड्यूल के एक्टिव होने का सुराग मिला। जांच में आया कि नेटवर्क की सबसे अहम महिला सदस्य डॉ. शाहीन सईद थी। वह जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से जुड़ी थी। यह मॉड्यूल 4 अक्टूबर को सहारनपुर में डॉ. आदिल की शादी से एक्टिव हुआ था। शादी में कुछ खास मेहमान भी आए थे, जिनकी पहचान में एजेंसियां जुटी हैं। शादी के अगले दिन मॉड्यूल ने काम शुरू कर दिया। इसका मकसद फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर लगाना, हथियारों की सप्लाई और पैसों की व्यवस्था करना था। डॉ. आदिल लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल चैनल संभालता था। नेटवर्क का प्लान था कि मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में फंडिंग और ट्रांसपोर्टेशन चैनल बनाए जाएं।

पोस्टर से मिला सुराग

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच की शुरुआत कश्मीर के नौगाम में 19 अक्टूबर को जैश के पोस्टर से हुई। पुलिस ने केस दर्ज किया। 27 अक्टूबर को फिर से 25 से ज्यादा पोस्टर लगे। 50 अधिकारियों ने 60 सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो 31 अक्टूबर को डॉ. आदिल फुटेज में दिखा, जो पोस्टर लगाने वाले इलाकों में घूम रहा था। फोन सर्विलांस से मालूम हुआ कि वह पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क में था, उसकी लोकेशन सहारनपुर मिली। 6 नवंबर को उसे गिरफ्तार किया गया। उससे एके-47, ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद हुए। उसने पूछताछ में बताया कि फरीदाबाद में पढ़ा रहे डॉ. मुजम्मिल के पास भारी मात्रा में विस्फोटक है। 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस फरीदाबाद पहुंची और मुजम्मिल को पकड़ लिया गया।

पहले डॉक्टर, फिर बने आतंकी

कश्मीर के पुलवामा के कोइल गांव के डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी साथ पढ़े और डॉक्टर बने। फिर दोनों आतंक की राह पर चले। उनके घर 800 मीटर दूर हैं। अब मुजम्मिल गिरफ्तार और उमर धमाके में मारा गया। उमर के बहनोई ने बताया कि उसने आखिरी बार शुक्रवार दोपहर कॉल किया था। उसने कहा था कि चार दिन बाद घर लौटेगा।

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