अरविंद केजरीवाल सौजन्य-IANS
दिल्ली

मोदी सरकार का अंत तय... सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर भड़के केजरीवाल, दिल्ली जल बोर्ड टेंडर केस पर कही ये बात

Delhi Jal Board Corruption Case: दिल्ली जल बोर्ड STP टेंडर मामले में ACB ने सत्येंद्र जैन और पूर्व CEO उदित प्रकाश राय समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। केजरीवाल ने गिरफ्तारी का विरोध किया।

प्रिया जैस

Arvind Kejriwal Delhi Jal Board Tender Case: दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में एंटी-करप्शन ब्रांच ने जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं।

सत्येंद्र कुमार जैन को मेडिकल जांच के लिए अरुणा आसफ अली अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल जांच के बाद पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तारी के बाद विकास भवन में रखा गया है।

अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर साधा निशाना

सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बयान जारी किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को एक बार फिर बीजेपी के इशारे पर गिरफ्तार किया गया है। कुछ ही समय पहले, उन्हें जेल में डालकर जो तकलीफ दी गई थी, वह सबको याद है। पिछला मामला भी झूठा था और यह मामला भी झूठा साबित होगा।

बीजेपी की तानाशाही कब तक ऐसे ही चलती रहेगी? जिसे भी वे चाहें, उस पर झूठे आरोप लगाकर जेल में डाल देते हैं। उनके झूठ एक बार फिर देश के सामने बेनकाब होंगे, लेकिन जेल में बिताए समय और मानसिक प्रताड़ना की भरपाई कौन करेगा?

अब बीजेपी के पापों का घड़ा भर चुका है। वे चाहे कितनी भी तानाशाही कर लें, मोदी सरकार का अंत अब तय है। पूरी आम आदमी पार्टी और देश की जनता सत्येंद्र जैन के साथ मजबूती से खड़ी है।

एसीबी ने इन आरोपियों को किया गिरफ्तार

एसीबी की ओर से गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में उदित प्रकाश राय (पूर्व सीईओ, दिल्ली जल बोर्ड), अंकित श्रीवास्तव (पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट, DJB), नागेंद्र यादव (प्रोपराइटर, AN इंटरप्राइजेज), राजा कुमार कुर्रा (मालिक, यूरोटेक इनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड) और पंकज वर्मा (प्रोपराइटर, श्रीजंहार) शामिल हैं।

ये मामला 11 मई 2024 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अलावा धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराएं शामिल हैं।

टेंडर की शर्तों में हेरफेर

ये मामला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह बदला गया, जिससे एक खास कंपनी 'यूरोटेक इनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड' को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाया जा सके, प्रस्तावित पायलट स्टडी कराए बिना ही ऐसी शर्तें जोड़ी गई।

जिससे दूसरी कंपनियों का कंपीटीशन खत्म हो गया। इससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा। एसीबी को जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। प्राइवेट व्यक्त्तियों, बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत और ई-मेल के विश्लेषण से सामने आया कि टेंडर के दस्तावेज और कॉरिजॅडम पहले ही आपस में साझा कर लिए गए थे।

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