Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को इमारत गिरने के हादसे में एक व्यक्ति की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं, तीन छात्रों के घायल होने की बात कही जा रही है। हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
यह हादसा मोती बाग इलाके में सत्य निकेतन स्थित शिव मंदिर के पास हुआ। यह क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं।
चश्मदीदों के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें करीब 40-45 छात्र मौजूद थे। उनका दावा है कि इनमें से करीब 30-35 छात्र अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं।
हालांकि, छात्रों के फंसे होने की यह संख्या फिलहाल आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है। प्रशासन और बचाव दल मलबा हटाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटे हैं।
चश्मदीदों का कहना है कि रविवार को छुट्टी होने की वजह से इमारत में छात्रों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो सकती थी। इसी वजह से हादसे के बाद छात्रों के बड़ी संख्या में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसे के बीच एक छात्र का वीडियो सामने आया है, जिसने कथित तौर पर मलबे के अंदर से वीडियो बनाकर मदद की गुहार लगाई। वीडियो में छात्र का शरीर मलबे में दबा दिखाई दे रहा है और उसके चेहरे पर खून भी नजर आ रहा है। उसके चेहरे के पास थोड़ी जगह दिखाई दे रही है।
छात्र ने इस मुश्किल स्थिति में भी वीडियो रिकॉर्ड कर मदद मांगने की कोशिश की। इस वीडियो के सामने आने के बाद राहत और बचाव अभियान को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
घटनास्थल पर जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। बचाव दल बेहद सावधानी के साथ सर्च ऑपरेशन चला रहा है, क्योंकि मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका है।
स्थानीय लोग भी प्रशासन और राहत टीमों के साथ बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाने और लोगों को तलाशने की कोशिश शुरू कर दी थी।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी है। लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा जा रहा है ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।
दमकल विभाग के कर्मियों ने मलबे से कुछ लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाए जाने की जानकारी दी है। हालांकि, कितने लोग मलबे में फंसे हैं, कितने लोगों को बचाया गया है और कितने घायल हैं, इस संबंध में अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
हादसे के बाद ढही इमारत की मंजिलों और उसके इस्तेमाल को लेकर भी अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे हॉस्टल या पीजी बताया जा रहा है, जबकि अन्य जगहों पर इमारत की संरचना को लेकर अलग जानकारी दी गई है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही हादसे में प्रभावित लोगों की सही संख्या और इमारत से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।