Delhi Satya Niketan Building Collapse Reason: साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। अब तक 7 लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, हादसे में दो लोगों की मौत हुई है और दो अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, हादसे वाली इमारत के मालिक की पहचान आनंद बंसल के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम में रहता है। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि आनंद बंसल के तीन से चार पीजी संचालित होते हैं। हादसे वाली बिल्डिंग में करीब 10 कमरों का पीजी चल रहा था।
जानकारी के मुताबिक, हादसे वाली इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले बिल्डिंग को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था। वहीं, लगभग एक साल पहले भी इमारत को खाली कराया गया था।
इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मेडिकल शॉप चलने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद इस बात की भी जांच की जा रही है कि निर्माण या रेनोवेशन के दौरान बिल्डिंग की संरचना से किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी मंगाए गए हैं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहा है।
दिल्ली फायर सर्विसेज को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके कुछ मिनट बाद साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को करीब 1:34 बजे PCR कॉल मिली, जिसमें नानकपुरा गुरुद्वारे के पास बिल्डिंग गिरने की जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, दिल्ली पुलिस, CAT एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल पर आठ फायर टेंडर तैनात किए गए हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
घटनास्थल पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि बिल्डिंग गिरने से कुछ समय पहले उसे तेज आवाज सुनाई दी थी। चश्मदीद के मुताबिक, आवाज इतनी तेज थी कि ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो।
उसने बताया कि आसपास धुआं और धूल का गुबार छा गया था और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग ढह गई। चश्मदीदों का दावा है कि मलबे के अंदर से लोगों के चिल्लाने की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। हालांकि, मलबे में इस समय कितने लोग फंसे हैं, इसकी आधिकारिक संख्या अभी सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत में रेनोवेशन का काम चल रहा था। उनका दावा है कि ऊपर का स्ट्रक्चर मजबूत किया गया था, लेकिन नीचे के पिलर कमजोर थे। ग्राउंड फ्लोर पर किराए के लिए जगह तैयार करने के उद्देश्य से काम चलने की बात भी सामने आई है।
कुछ लोगों का दावा है कि नीचे काम कर रहे मजदूर भी मलबे में दब गए। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, हादसे वाली इमारत को 'हॉस्टल डेज' के नाम से संचालित किया जा रहा था। इसके मालिकों के तौर पर हरिओम बंसल और आनंद बंसल के नाम बताए जा रहे हैं।
बताया गया है कि इमारत में चार फ्लोर और उसके ऊपर टेरेस था। हर फ्लोर पर करीब चार कमरे होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग मंजिलों पर कमरों का किराया भी अलग था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर पर एक बेड वाले कमरे का किराया करीब 18 हजार रुपये, तीसरी मंजिल पर करीब 16 हजार और चौथी मंजिल पर करीब 14 हजार रुपये था। कुछ कमरों में एक से ज्यादा बेड लगाए गए थे और छात्रों को किराए पर दिए जाते थे।
स्थानीय लोगों ने इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कमरों तक पहुंचने के लिए संकरी गलियां थीं और आग या इमारत गिरने जैसी आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए दूसरा एग्जिट गेट नहीं था।
फिलहाल दिल्ली पुलिस और प्रशासन हादसे की जांच कर रहे हैं। मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है। वहीं, बचाव दल का फोकस मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने पर है।