Delhi Race Club Case: दिल्ली रेस क्लब को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पितांबर दत्त ने रेस क्लब के खिलाफ जारी बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि क्लब को अपना पक्ष रखने और जवाब, साक्ष्य दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिए गए थे, लेकिन उसने उनका इस्तेमाल नहीं किया।
दिल्ली रेस क्लब की ओर से सीनियर वकील ने दलील दी कि एस्टेट ऑफिसर ने क्लब को शिकायत की प्रति उपलब्ध नहीं कराई और इस वजह से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ।
हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने 27 अप्रैल 2026 के एस्टेट ऑफिसर के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उसमें शिकायत की प्रति क्लब को दिए जाने का स्पष्ट उल्लेख है। अदालत के मुताबिक, इस आदेश पर क्लब के सचिव और कानूनी प्रतिनिधि के हस्ताक्षर भी थे। अदालत ने कहा कि इसके बाद किसी भी तारीख पर रेस क्लब ने यह शिकायत नहीं की कि उसे शिकायत की प्रति नहीं मिली है। इसके बावजूद उसने अपना जवाब और साक्ष्य दाखिल नहीं किया।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब केंद्र सरकार की ओर से 12 मार्च 2026 को क्लब को नोटिस जारी कर जमीन और पूरे परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने को कहा गया। नोटिस में 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने को कहा गया था।
इसके बाद रेस क्लब ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। वहां केंद्र की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि क्लब को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना बेदखल नहीं किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद 9 अप्रैल 2026 को वह मामला निपटा दिया गया था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने एस्टेट ऑफिसर के समक्ष सार्वजनिक परिसर से बेदखली की कार्यवाही शुरू की। क्लब को शो-कॉज नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन कोर्ट के मुताबिक रेस क्लब ने इस कार्यवाही में प्रभावी तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा और जवाब दाखिल नहीं किया।
दिल्ली रेस क्लब ने किराये के भुगतान का भी हवाला देते हुए कहा कि वह लगातार किराया देता रहा है और इसलिए उसे अनधिकृत कब्जेदार नहीं माना जा सकता।
इस दलील पर कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार 1994 के बाद लीज को आगे बढ़ाने या उसका नवीनीकरण करने के लिए कोई दस्तावेज जारी नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लीज की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद केवल किराये का भुगतान करते रहने से समाप्त हो चुकी लीज अपने आप रिन्यू नहीं हो जाती
सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार विमर्श करने के बाद कोर्ट ने माना कि क्लब 11 अगस्त 2026 के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाने में सफल नहीं रहा है।
इस आधार पर अंतरिम रोक की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया गया। हालांकि, मुख्य अपील को 26 सितंबर 2026 को सुनवाई और निपटारे के लिए सूचीबद्ध किया गया है।