भूमि पेडनेकर  
दिल्ली

ट्रोलिंग, मेंटल हेल्थ और क्लाइमेट चेंज...नवभारत के मंच पर भूमि पेडनेकर ने रखी बेबाक राय, जानें क्या कुछ कहा

Navbharat Conclave 2026: नवभारत कॉन्क्लेव 2026 में भूमि पेडनेकर ने कहा कि महिलाओं के बिना विकसित भारत असंभव है। उन्होंने क्लाइमेट चेंज को मानवता का सबसे बड़ा खतरा बताया।

अर्पित शुक्ला

Bhumi Pednekar in Navbharat Viksit Bharat Leadership Conclave: देश के अग्रणी मीडिया समूह नवभारत द्वारा आयोजित 'विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026' में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने विकसित भारत, महिला सशक्तिकरण, मानसिक स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें नजरअंदाज कर देश आगे नहीं बढ़ सकता।

भूमि पेडनेकर ने कहा कि आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सोशल मीडिया पर बढ़ती ट्रोलिंग और बच्चों को लगातार ऑब्जेक्टिफाई किए जाने का असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत सामाजिक और संस्थागत ढांचे की आवश्यकता है।

'क्लाइमेट चेंज मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा'

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए भूमि ने कहा कि विकसित भारत के लिए जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से काम करना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, क्लाइमेट चेंज मानवता के सामने सबसे बड़ा संकट है और भारत दुनिया के सामने यह उदाहरण पेश कर सकता है कि सामूहिक प्रयासों से सकारात्मक बदलाव कैसे लाया जा सकता है।

नवभारत के मंच पर भूमि पेडनेकर

'महिलाओं को हेल्थकेयर से सशक्त बनाना होगा'

उन्होंने कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अभी करीब 21 वर्ष का समय है और इस लक्ष्य को महिलाओं की भागीदारी के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। भूमि ने कहा कि जब तक महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक उनकी कार्यबल में भागीदारी भी नहीं बढ़ेगी। बेहतर हेल्थकेयर महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

'देश के मुद्दों पर कलाकारों को भी बोलना चाहिए'

भूमि पेडनेकर ने कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई कलाकार सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय रखने से बचते हैं और मानते हैं कि जो हो रहा है, उसे होने देना चाहिए। लेकिन वह इस सोच से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, "देश में जो कुछ भी होता है, उसका सीधा असर हम सभी पर पड़ता है। इसलिए समाज और देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना जरूरी है।"

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