अध्यक्ष चंद्रिका बंजारे सोर्स- सोशल मीडिया
रायपुर

अभनपुर जनपद में अविश्वास प्रस्ताव: 9 सदस्यों ने अध्यक्ष चंद्रिका बंजारे के खिलाफ खोला मोर्चा

Abhanpur News : अभनपुर जनपद पंचायत में अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। 9 सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ आवेदन एसडीएम को सौंपा गया।

ऐश्वर्या द्विवेदी

Abhanpur Janpad Panchayat News : अभनपुर जनपद पंचायत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। नौ जनपद पंचायत सदस्यों ने हस्ताक्षर करके आवेदन सौंपा है। एसडीएम कार्यालय ने मामला कलेक्टर को भेजने की बात कही है। छत्तीसगढ़ की स्थानीय राजनीति में इससे तनाव काफी बढ़ गया है।

अभनपुर जनपद अध्यक्ष पर संकट

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की अभनपुर जनपद पंचायत में अचानक सरगर्मी बढ़ गई है। स्थानीय राजनीति में अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा तेजी से शुरू हो गई है। जनपद पंचायत अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। पंचायत के कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष को हटाने की लिखित मांग की है।

9 सदस्यों ने खोले हस्ताक्षर

कुल 25 सदस्यों वाली अभनपुर जनपद पंचायत में यह बड़ा कदम उठाया गया है। आवेदन के साथ 9 सदस्यों के हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं। वर्तमान अध्यक्ष चंद्रिका बंजारे भाजपा समर्थित हैं। वहीं अविश्वास प्रस्ताव की मांग करने वाले सदस्य कांग्रेस समर्थित माने जा रहे हैं। इस राजनीतिक टकराव से क्षेत्र में काफी चर्चाएं हो रही हैं।

अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

सदस्यों ने आवेदन में अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष की काम करने की शैली पर सवाल खड़े किए गए हैं। सदस्यों का कहना है कि उन्हें निर्णयों में शामिल नहीं किया जाता। महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में उनकी अनदेखी की जा रही है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों में गहरा असंतोष फैल रहा है। सदस्यों ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने विशेष सम्मेलन बुलाकर मतदान कराने की बात कही है।

कलेक्टर के पाले में पहुंची गेंद

यह आवेदन सबसे पहले अभनपुर एसडीएम कार्यालय में जमा किया गया। लेकिन उपमंडलीय अधिकारी ने अपना रुख तुरंत स्पष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में सक्षम अधिकारी कलेक्टर हैं। जनपद अध्यक्ष पर कार्रवाई का अधिकार जिला प्रशासन के पास होता है। इसी वजह से अब सबकी नजरें जिला मुख्यालय पर टिक गई हैं।

आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया

कलेक्टोरेट स्तर पर आवेदन की बारीकी से जांच की जाएगी। प्रशासनिक टीम सभी हस्ताक्षरों का सही परीक्षण करेगी। इसके बाद ही विशेष सम्मेलन बुलाने पर कोई निर्णय लिया जाएगा। अगर प्रक्रिया आगे बढ़ी तो जनपद में मतदान की स्थिति बनेगी। फिलहाल दोनों ही दल अपने-अपने समीकरण साधने में लगे हैं। ग्रामीण राजनीति का यह ऊंट किस करवट बैठेगा, यह वक्त बताएगा।

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