कांकेर विकास कार्य निरस्त सोर्स - नवभारत लाइव
कांकेर

कांकेर में 23 करोड़ के कामों पर नए कलेक्टर की रोक, 150 करोड़ का टीनाशेड घोटाला चर्चा में

Kanker Development Work Cancelled : कांकेर में नए कलेक्टर ने DMF के 23 करोड़ के 92 कार्य निरस्त किए। टीनाशेड निर्माण में 150 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा।

मोहनीश सोनी, ऐश्वर्या द्विवेदी

Highlights

  • कांकेर में DMF फंड से 23 करोड़ के कार्य निरस्त।

  • तबादले के बाद मंजूरी, नए कलेक्टर ने लगाई रोक।

  • टीनाशेड निर्माण के नाम पर करोड़ों के झोल का आरोप।

  • सब इंजीनियर और एसडीओ की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।

  • 150 करोड़ के टीनाशेड घोटाले का मामला गर्माया।

Chhattisgarh DMF Scam Update : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। जिला खनिज न्यास निधि से मंजूर 92 कार्यों को निरस्त कर दिया गया है। इन कार्यों की कुल लागत लगभग 23 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तत्कालीन कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर के कार्यकाल में यह स्वीकृति मिली थी। उनका तबादला आदेश 6 अगस्त को जारी हुआ था। इसके ठीक दो दिन बाद 8 अगस्त को फाइल पास कर दी गई। नए कलेक्टर के आते ही पूरे मामले में मोड़ आ गया। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर सभी स्वीकृतियों पर रोक लगा दी।

टीनाशेड निर्माण में गड़बड़ी का आरोप

जिले में पिछले दो वर्षों से डीएमएफ का पैसा खर्च हो रहा है। विशेष रूप से टीनाशेड निर्माण के नाम पर भारी बजट पास किया गया। दुर्गूकोंदल ब्लॉक में 41 टीनाशेड के लिए 8 करोड़ स्वीकृत हुए थे। भानुप्रतापपुर ब्लॉक में 70 से अधिक टीनाशेड के लिए 10 करोड़ मिले। कांकेर ब्लॉक में भी 36 स्थानों के लिए 6.10 करोड़ रुपये दिए गए। आरोप है कि घटिया निर्माण के बावजूद मूल्यांकन रिपोर्ट सही बनाई गई। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अमानक निर्माण की जांच होने पर कई बड़े अफसर फंस सकते हैं।

सीईओ के हस्ताक्षर पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने ही फाइल आगे बढ़ाई थी। उनके हस्ताक्षर के बाद ही कलेक्टर ने अंतिम मंजूरी दी थी। अब वही सीईओ अपने डिजिटल हस्ताक्षर से आदेश निरस्त कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। बिना सीईओ की हरी झंडी के कोई प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ता था। अचानक रुख बदलने से पूरी प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो गया है।

150 करोड़ का टीनाशेड घोटाला

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और अधिवक्ता सुनील गोस्वामी ने जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो सालों में जमकर बंदरबांट की गई है। भाजपा सरकार के दौरान टीनाशेड के नाम पर बड़ा खेल हुआ। सीसी सड़क और पुलिया निर्माण की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दावा है कि टीनाशेड निर्माण में भारी कमीशनखोरी चली है। विभिन्न ब्लॉकों में लगभग 150 करोड़ रुपये टीनाशेड में झोंके गए। यह मामला आगामी विधानसभा सत्र में जोर-शोर से उठ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।

"दो साल में खनिज न्यास निधि से हुए सभी विकास कार्यों की जांच की जानी चाहिए। दो साल में करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया गया है। मानक और गुणवत्ता की जांच के साथ टीनाशेड निर्माण की पड़ताल की जाए तो कई सवाल सामने आ सकते हैं।"
— सुनील गोस्वामी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता

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