

समृद्ध पंचायत राज अभियान में पुणे जिला परिषद को राज्य में दूसरा स्थान।
ग्राम पंचायतों ने ₹245 करोड़ कर वसूला, जनभागीदारी से ₹7.97 करोड़ जुटाए।
60,833 महिलाओं की सालाना आय ₹1 लाख से अधिक; 7.12 लाख पौधे लगाए गए।
Maharashtra Rural Development Scheme: मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान के पहले वर्ष में पुणे जिले ने ग्रामीण विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। अभियान के तहत जिले की ग्राम पंचायतों ने करीब 245 करोड़ रुपये का बकाया कर वसूल किया, जबकि जनभागीदारी से 7.97 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई।
आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने, महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं में सुधार के आधार पर पुणे जिला परिषद ने राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया।
वहीं, पुरंदर तहसील की आडाचीवाड़ी ग्राम पंचायत राज्य में पहले स्थान पर रही, यह जानकारी जिला परिषद अध्यक्ष विरधवल जगदाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभियान के तहत जिले की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस मौके पर जिला परिषद उपाध्यक्ष विवेक वळसे पाटील, सभागृह नेता श्रीमंत ढोले और अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे उपस्थित थे।
जगदाले ने बताया कि अभियान में जिले की 276 ग्राम पंचायतों ने हिस्सा लिया। इनके कामकाज की निगरानी के लिए जिला और तहसील स्तर पर नियमित समीक्षा, डिजिटल मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय की व्यवस्था की गई। अभियान के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए वॉर रूम बनाए गए और ग्राम पंचायत स्तर पर समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति की गई। ‘समृद्ध दिवाली’, ‘समृद्ध पाडवा’, ‘एक दिन समृद्धि के लिए’ और ‘कॉफी विद सीईओ’ जैसे उपक्रमों के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया।
पुणे जिले में अभियान के दौरान करीब 245 करोड़ रुपये की बकाया कर वसूली से ग्राम पंचायतों के स्वयं के राजस्व को मजबूती मिली। इससे स्थानीय विकास कार्यों, स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिली।
इसके अलावा, ग्रामीणों की भागीदारी से 7.97 करोड़ रुपये की जनवर्गणी जुटाई गई। इससे गांवों के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
महिला आर्थिक सशक्तीकरण के तहत जिले में 11,092 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जबकि 5,147 समूहों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई गई। अभियान के आंकड़ों के अनुसार, 60,833 महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हुई।
इन प्रयासों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार, लघु उद्योग और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में 4,995 दिव्यांगों को यूडीआईडी कार्ड दिए गए, जबकि 16,389 पात्र वंचित लाभार्थियों को सामाजिक अर्थसहायता योजनाओं का लाभ दिलाया गया।
जल सुरक्षा मजबूत करने के लिए 734 जलस्रोतों का सुदृढ़ीकरण किया गया। कृषि क्षेत्र में 5,244 सौर कृषि पंप लगाए गए, जबकि पर्यावरण संरक्षण के तहत 7,12,587 पौधे लगाए गए। इनके दीर्घकालीन लाभ पौधों के नियमित रखरखाव और जलस्रोतों के उचित प्रबंधन पर निर्भर करेंगे। ग्रामीण सुविधाओं के विकास के तहत 230 खुली एवं बंद व्यायामशालाएं तैयार की गईं।
इसके अलावा, 651 स्कूलों, 846 आंगनवाड़ी केंद्रों और 154 पशु चिकित्सा अस्पतालों को विभिन्न सुविधाओं से सुसज्जित किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से जिले में 1,65,274 मानव-दिवस का रोजगार सृजित किया गया। इससे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ सार्वजनिक उपयोग की परिसंपत्तियों के निर्माण को भी बढ़ावा मिला।
जिला परिषद अध्यक्ष विरधवल जगदाले ने कहा कि जिले को मिला दूसरा स्थान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सरपंचों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आगामी चरण में अधिक जनभागीदारी, बेहतर नियोजन और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के जरिए प्रत्येक गांव को समृद्ध, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने की अपील की।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट