78 वर्ष की उम्र में विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन।
हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में ली अंतिम सांस।
12 अगस्त 1948 को बालोद में हुआ था जन्म।
जनजीवन में उनकी पहचान एक शिक्षक के रूप में बनी।
BJP MLA Doman Lal Korsewada Passes Away: छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहिवारा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का 30 अक्टूबर को 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से भाजपा संगठन, अहिवारा विधानसभा क्षेत्र और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षक से जनप्रतिनिधि तक का सफर तय करने वाले कोर्सेवाड़ा ने अपने सार्वजनिक जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा और राजनीति को समर्पित किया।
उनका पार्थिव शरीर 31 अक्टूबर को हैदराबाद से रायपुर लाया गया। इसके बाद भिलाई-3 स्थित उनके शासकीय निवास और दुर्ग के जवाहर नगर में अंतिम दर्शन एवं श्रद्धांजलि के कार्यक्रम के बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव भेण्ड्रा ले जाया जाना निर्धारित है। बालोद जिले की गुंडरदेही तहसील स्थित भेण्ड्रा गांव में दोपहर करीब दो बजे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का जन्म 12 अगस्त 1948 को हुआ था। उनके पिता का नाम नम्मू दास कोर्सेवाड़ा था। मूल रूप से बालोद जिले के भेण्ड्रा गांव से जुड़े कोर्सेवाड़ा ने राजनीति में आने से पहले शिक्षा के क्षेत्र में लंबा समय बिताया। उन्होंने राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और बीएड की डिग्री हासिल की थी। जनजीवन में उनकी पहचान एक शिक्षक के रूप में बनी। विद्यार्थियों को पढ़ाने और समाज के बीच सक्रिय रहने के कारण लोग उन्हें सम्मानपूर्वक ‘गुरुजी’ कहकर भी संबोधित करते थे।
कोर्सेवाड़ा ने जनवरी 1972 में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। आगे चलकर उन्होंने व्याख्याता के रूप में भी सेवाएं दीं। शिक्षा विभाग में काम करते हुए उनका संपर्क आम लोगों और सामाजिक गतिविधियों से बढ़ा। इसके बाद उन्होंने पूर्व सांसद ताराचंद साहू के निज सहायक के रूप में करीब 12 वर्ष तक काम किया। इस दौरान उन्हें राजनीतिक गतिविधियों, जनसंपर्क और क्षेत्रीय समस्याओं को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इसी अनुभव ने उनके राजनीतिक जीवन की नींव तैयार की। सक्रिय राजनीति में आने के लिए उन्होंने शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखा।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के राजनीतिक सफर में वर्ष 2008 महत्वपूर्ण रहा। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई अहिवारा विधानसभा सीट से भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक बने और अहिवारा के पहले विधायक के रूप में पहचान हासिल की। हालांकि, वर्ष 2013 में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और सांवलाराम डाहरे को उम्मीदवार बनाया। वर्ष 2018 में भी पार्टी ने डाहरे पर भरोसा जताया। इसके बावजूद कोर्सेवाड़ा क्षेत्र में सक्रिय रहे और संगठन के साथ जुड़े रहे।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर मौका दिया। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे को 25,263 मतों के अंतर से हराकर दूसरी बार विधानसभा में प्रवेश किया। उनका यह चुनावी प्रदर्शन क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ और पार्टी के भरोसे को दर्शाता है।
कोर्सेवाड़ा को नवंबर 2025 में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। विधायक के रूप में वे क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे। विधानसभा के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच उनकी सदन में उपस्थिति 100 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसी अवधि में उन्होंने 24 प्रश्न पूछे थे। ये आंकड़े उनके विधायी कार्यकाल की गतिविधियों की एक झलक देते हैं। वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गुरु घासीदास सम्मान और वर्ष 2013 में श्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा की पत्नी कमला कोर्सेवाड़ा दुर्ग जिला मंडी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके बेटे धनंजय कोर्सेवाड़ा गुंडरदेही जनपद पंचायत के सदस्य रहे हैं। इस तरह उनका परिवार भी सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़ा रहा।
जानकारी के मुताबिक, कोर्सेवाड़ा फेफड़ों में संक्रमण की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें बेहतर उपचार के लिए हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 30 अक्टूबर को उनका निधन हो गया। उनके निधन पर भाजपा के नेताओं और समर्थकों ने शोक व्यक्त किया। पार्टी के लिए यह एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि को खोने का दुख है, वहीं अहिवारा क्षेत्र के लिए भी यह बड़ी क्षति मानी जा रही है।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का जीवन एक शिक्षक से विधायक बनने तक के सफर की कहानी है। शिक्षा विभाग में करीब साढ़े तीन दशक तक सेवाएं देने, राजनीतिक अनुभव हासिल करने और फिर दो बार विधानसभा पहुंचने तक उन्होंने कई भूमिकाएं निभाईं। अहिवारा के पहले विधायक के रूप में उनका नाम क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में दर्ज रहेगा। उनके निधन से भाजपा ने एक अनुभवी नेता खो दिया, जबकि क्षेत्र ने ऐसे जनप्रतिनिधि को खोया जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा, संगठन और जनसेवा में बिताया।