छत्तीसगढ़ में खून जैसा लाल आसमान Source- Social Media/Screen Capture
छत्तीसगढ़

कहीं खून जैसा लाल, कहीं नारंगी आसमान! छत्तीसगढ़ में दिखा हैरान करने वाला नजारा; VIDEO हो रहा वायरल

Chhattisgarh Red Sky Reason: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और किरंदुल से आसमान के लाल-नारंगी रंग के वीडियो सामने आए हैं। क्या यह चक्रवात अर्नब का असर है या धूल और सूरज की रोशनी का खेल?

अर्पित शुक्ला

Highlights

  • छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आसमान के लाल-नारंगी रंग की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं।

  • तेज हवाओं से धूल के कण फैलने और सूरज की रोशनी के प्रकीर्णन से आसमान का रंग बदल सकता है।

  • आसमान का रंग बदलने और चक्रवात अर्नब के बीच सीधा संबंध अभी पुष्ट नहीं हुआ है।

Chhattisgarh Red Sky Viral Video: छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आसमान का रंग नारंगी-लाल दिखाई देने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। दंतेवाड़ा और किरंदुल जैसे इलाकों से जोड़कर साझा किए जा रहे वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है। इस बीच चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मध्य भारत में तेज हवाओं और बारिश की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तूफान की वजह से आसमान का रंग बदल गया?

मौसम से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, आसमान के असामान्य रंग का चक्रवात से सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। हालांकि, तेज हवाओं के कारण वातावरण में धूल और मिट्टी के कण फैलने से आसमान का रंग प्रभावित हो सकता है। सूरज की रोशनी, बादलों की स्थिति और हवा में मौजूद कण भी इस तरह के नजारे की वजह बन सकते हैं।

क्या चक्रवात अर्नब की वजह से लाल हुआ आसमान?

चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर होकर मध्य भारत की ओर बढ़ा। इसके अवशेषों के कारण छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में बारिश तथा तेज हवाओं की आशंका बनी हुई थी। इसी दौरान आसमान के नारंगी-लाल दिखाई देने के वीडियो सामने आए।

हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि छत्तीसगढ़ में आसमान का रंग बदलने की सीधी वजह चक्रवात ही था। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, तेज हवाएं धूल, रेत और मिट्टी के कणों को हवा में ऊपर उठा सकती हैं। यदि मिट्टी में लौह तत्वों से भरपूर लाल कण मौजूद हों, तो वे सूरज की रोशनी के साथ मिलकर आसमान को लाल या नारंगी रंग का दिखा सकते हैं।

आखिर क्यों बदल जाता है आसमान का रंग?

आसमान का रंग बदलने के पीछे सूरज की रोशनी और वायुमंडल में मौजूद कणों की अहम भूमिका होती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूरज की रोशनी को वातावरण में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस दौरान नीली रोशनी अधिक बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की रोशनी अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देती है।

इसे वैज्ञानिक भाषा में प्रकाश का प्रकीर्णन कहा जाता है। हवा में मौजूद धूल, धुआं, पानी की छोटी बूंदें और बादल भी रोशनी के बिखरने और उसके रंग को प्रभावित कर सकते हैं।

आमतौर पर आसमान नीला दिखाई देता है, लेकिन जब वातावरण में धूल के कण बढ़ जाते हैं या बादलों और सूरज की स्थिति में बदलाव होता है, तो आसमान का रंग सामान्य से अलग दिख सकता है। कुछ खास परिस्थितियों में यह नारंगी, गुलाबी या गहरा लाल भी नजर आ सकता है।

क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?

आसमान का लाल या नारंगी दिखाई देना अपने आप में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का संकेत नहीं है। इसके पीछे सामान्य वायुमंडलीय प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। हालांकि, यदि ऐसा नजारा तेज हवाओं, आंधी या गरज-चमक के दौरान दिखाई दे, तो मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए।

चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद भी मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ था। ऐसे मौसम में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

Firecracker Ban: पटाखों पर बैन के पक्ष में नहीं SC, विराट कोहली का जिक्र कर क्या कहा?

विधान परिषद चुनाव में केवल एक सीट पर कांग्रेस की विजय, जानें भाजपा के गढ़ में अभिजीत की जीत के 10 बड़े कारण

PM आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद पर नहीं चलेगा बुलडोजर, हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या कहा?

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू यादव को राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने ED को जारी किया नोटिस

पुलिस की लाठियों की चिंता मत करो, राहुल गांधी की जनता से अपील, कहा- 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च में शामिल हो