स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट डाउन सोर्स - AI जनरेटेड
छत्तीसगढ़

डिजिटल छत्तीसगढ़ का सच: महीनों से बंद पाठ्य पुस्तक निगम की वेबसाइट, पोर्टल पर अब भी पुरानी लिंक

School Education Department Website Down : सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट के बाद सर्वर पर होस्ट होगी वेबसाइट, निगम के अधिकारी ने कहा अभी और लगेगा समय; छात्रों और आम नागरिकों को इंतजार

जयदास मानिकपुरी, ऐश्वर्या द्विवेदी

Highlights

  • डिजिटल छत्तीसगढ़ का सच: महीनों से बंद है सरकारी वेबसाइट।

  • शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अब भी पुरानी लिंक मौजूद।

  • सुरक्षा ऑडिट के चक्कर में अटकी पाठ्य पुस्तक निगम की साइट।

  • किताबों की जानकारी के लिए भटक रहे छात्र और अभिभावक।

  • वेबसाइट बंद होने से पारदर्शिता पर खड़े हुए गंभीर सवाल।

Chhattisgarh Textbook Corporation : छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज को डिजिटल बनाने और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के दावों के बीच छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की आधिकारिक वेबसाइट लंबे समय से बंद है। वेबसाइट के बंद होने से निगम से जुड़ी सार्वजनिक सूचनाओं तक पहुंचने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अब भी निगम की पुरानी वेबसाइट की लिंक मौजूद होने का मामला सरकारी पोर्टलों के नियमित रखरखाव और विभागों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े करता है।

इस मामले में निगम के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वेबसाइट अभी शुरू नहीं हुई है। सुरक्षा ऑडिट की पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद इसे सर्वर पर होस्ट किया जाएगा। अधिकारी के मुताबिक रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए संबंधित पक्ष से बात की गई है लेकिन वेबसाइट को दोबारा शुरू होने में अभी समय लग सकता है।

सुरक्षा ऑडिट के बाद शुरू होगी वेबसाइट

पाठ्य पुस्तक निगम की वेबसाइट को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया में सुरक्षा ऑडिट अहम कड़ी है। निगम के अधिकारी के अनुसार ऑडिट रिपोर्ट पूरी तरह मिलने के बाद ही वेबसाइट को सर्वर पर होस्ट किया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल वेबसाइट को शुरू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

निगम से संबंधित सुरक्षा ऑडिट के लिए जारी प्रमाणपत्र में बताया गया है कि सिक्योरआईज की सोनालिसा सुतार ने एनआईसीएसआई (NICSI) के वर्क ऑर्डर के तहत सुरक्षा ऑडिट का कार्य पूरा किया है।

प्रमाणपत्र में वर्क ऑर्डर क्रमांक O2502092 और परियोजना क्रमांक S161810MPCG का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध प्रमाणपत्र से यह स्पष्ट नहीं होता कि वेबसाइट को सर्वर पर होस्ट करने के लिए आवश्यक अंतिम ऑडिट रिपोर्ट जारी हो चुकी है या नहीं।

ऐसे में सवाल यह है कि जब तक वेबसाइट दोबारा शुरू नहीं होती तब तक आम नागरिकों को निगम की आधिकारिक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?

शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर पुरानी लिंक क्यों?

इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर मौजूद पाठ्य पुस्तक निगम की पुरानी वेबसाइट की लिंक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभाग के ‘डिपार्टमेंटल लिंक्स’ सेक्शन में अब भी पुराना यूआरएल दर्ज है जो काम नहीं कर रहा है।

यदि वेबसाइट का पता बदल चुका है या पुराना पोर्टल तकनीकी कारणों से बंद है तो विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक को अपडेट करना जरूरी है। सरकारी पोर्टल पर दी गई लिंक आम नागरिकों के लिए आधिकारिक सूचना का माध्यम होती है। ऐसे में पुरानी लिंक पर निर्भर रहने वाले उपयोगकर्ताओं को सही जानकारी तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।

संबंधित विभाग ने इस लिंक की समीक्षा क्यों नहीं की? क्या वेबसाइट के बंद होने की जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग के तकनीकी अमले तक पहुंची है? और यदि नई वेबसाइट तैयार होने में समय लगना है, तो क्या फिलहाल कोई वैकल्पिक लिंक उपलब्ध कराई जा सकती है?

सार्वजनिक सूचनाओं तक पहुंच का सवाल

पाठ्य पुस्तक निगम स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में इसकी वेबसाइट केवल तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि निगम की गतिविधियों और सार्वजनिक सूचनाओं तक पहुंचने का माध्यम भी है।

वेबसाइट उपलब्ध नहीं होने पर निविदाओं, खरीद प्रक्रिया, प्रिंटिंग ऑर्डर, पुस्तकों की उपलब्धता और वितरण से संबंधित सूचनाएं तलाशने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। हालांकि इन सभी सूचनाओं की अनुपलब्धता की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

क्योंकि संभव है कि कुछ जानकारियां दूसरे सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध हों। फिर भी यदि निगम की वेबसाइट लंबे समय से बंद है तो पारदर्शिता और सूचना की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट की जानी चाहिए।

आंतरिक व्यवस्था है, लेकिन आम लोगों के लिए क्या विकल्प?

निगम में पुस्तकों की ट्रैकिंग और वितरण की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि आंतरिक विभागीय व्यवस्था और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध सार्वजनिक वेबसाइट की भूमिका अलग-अलग है।

कर्मचारियों के लिए संचालित व्यवस्था से पुस्तकों की आपूर्ति पर निगरानी रखी जा सकती है, लेकिन इससे यह सुनिश्चित नहीं होता कि छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को सार्वजनिक सूचनाएं आसानी से मिल रही हैं।

ऐसे में निगम और स्कूल शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि वेबसाइट दोबारा शुरू होने तक ई-बुक्स, निविदाओं और अन्य सार्वजनिक सूचनाओं के लिए नागरिक किस आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें।

जिम्मेदार विभागों से सीधे सवाल

वेबसाइट को दोबारा शुरू करने के लिए सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया जरूरी हो सकती है लेकिन इस दौरान सार्वजनिक सूचना व्यवस्था को लेकर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

वेबसाइट की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट मिलने और उसे सर्वर पर होस्ट करने की प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा?

स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर पुरानी लिंक को कब अपडेट किया जाएगा? और तब तक आम नागरिकों को निगम की आधिकारिक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू यादव को राहत, दिल्ली हाई कोर्ट ने ED को जारी किया नोटिस

पुलिस की लाठियों की चिंता मत करो, राहुल गांधी की जनता से अपील, कहा- 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च में शामिल हो

बिहार म्यूजियम ने पेरिस के लूव्र और न्यूयॉर्क के द मेट को पछाड़ा, विश्व के टॉप 10 लिस्ट में शामिल

PM Kisan 24th Installment: दिवाली से पहले किसानों को तोहफा, कल पीएम किसान की 24वीं किस्त जारी करेंगे PM मोदी

ट्रोलिंग बंद करिए, अपना गढ़ संभालिए, PM मोदी को कांग्रेस का जवाब, नागपुर-वाराणसी में बड़ी हार की दिलाई याद