

6 नवंबर को किसान यूनियन का आंदोलन।
फसल क्षति की भरपाई के साथ कर्ज माफी की मांग।
जगदूराम कश्यप बोले,आश्वासन नहीं, चाहिए राहत।
बेमौसम बारिश से धान की खड़ी फसल पर संकट।
Bastar Rain Crop Loss Cyclonic Storm Arnab: इंद्रावती की बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों का दर्द अभी कम नहीं हुआ है और अब चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। एक ओर खेतों में धान की खड़ी फसल पर संकट है, तो दूसरी ओर बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे का इंतजार कर रहे किसान आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), बस्तर ने 6 नवंबर को जिला कलेक्टर कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। संगठन ने फसल क्षति का उचित मुआवजा देने और बाढ़ प्रभावित किसानों का कृषि ऋण माफ करने की मांग उठाई है।
बस्तर जिले में धान का दर्ज रकबा करीब 30,522 हेक्टेयर बताया गया है। अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश के बीच करीब 15 करोड़ रुपये की धान फसल पर संभावित नुकसान का खतरा जताया गया है। बुधवार देर रात हुई तेज बारिश से कई खेतों में खड़ी फसल पानी में डूबने की बात सामने आई है। हालांकि, बारिश के बाद वास्तव में कितने हेक्टेयर में फसल खराब हुई है, इसका आधिकारिक आकलन अभी सामने नहीं आया है।
सितंबर में इंद्रावती नदी में आई भीषण बाढ़ से पहले ही जिले के कई गांवों में फसलें प्रभावित हुई थीं। अब मौसम की दोहरी मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों के सामने फसल बचाने के साथ आगामी कृषि कार्यों, घरेलू जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च जुटाने की चुनौती भी है।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), बस्तर के ग्रामीण जिला अध्यक्ष जगदूराम कश्यप ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है। किसानों ने फसल क्षति के मुआवजे और कर्ज माफी के लिए कई बार आवेदन और निवेदन किए, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होने से निराशा बढ़ रही है।
कश्यप ने सवाल उठाया कि जब बाढ़ में किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं और कई परिवारों के पास बेचने के लिए पर्याप्त धान नहीं बचा, तो वे कर्ज की अदायगी और परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे? उन्होंने सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाकर सरकार से राहत दिलाने की पहल करने की मांग की।
संगठन के मुताबिक, 6 नवंबर को सुबह 11 बजे किसानों और ग्रामीणों का जमावड़ा दो स्थानों पर होगा। पीजी कॉलेज मैदान में बस्तर, तोकापाल और लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के किसान जुटेंगे। वहीं, लालबाग मैदान में नगरनार, जगदलपुर, बकावंड और बजावंड क्षेत्र के किसान एकत्रित होंगे। इसके बाद सभी कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन में विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के सदस्यों के शामिल होने की संभावना है। कश्यप ने किसानों, ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।
किसान यूनियन की प्रमुख मांग है कि इंद्रावती बाढ़ से प्रभावित किसानों को फसल क्षति का उचित मुआवजा तत्काल दिया जाए और प्रभावित किसानों का कृषि ऋण माफ किया जाए। संगठन का कहना है कि आपदा से प्रभावित किसानों को केवल आश्वासन देने के बजाय समयबद्ध राहत दी जानी चाहिए। अब 6 नवंबर के प्रस्तावित घेराव में किसानों की कितनी भागीदारी होती है और उनकी मांगों पर शासन-प्रशासन क्या रुख अपनाता है, इस पर नजर रहेगी।