26 साल के विकास पर उठे सवाल।
खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका पर जवाब मांगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास का आकलन करने पर जोर।
NMDC में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग।
Bastar NMDC Mineral Wealth of Bastar: बस्तर की धरती से लौह अयस्क निकालकर देश के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाने वाले एनएमडीसी (NMDC) से अब स्थानीय विकास का हिसाब मांगा जा रहा है। खनिज संपदा बस्तर की, परियोजनाएं बस्तर में, लेकिन स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिला और प्रभावित परिवारों को कितना लाभ पहुंचा? इन सवालों को लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष नवनीत चांद ने एनएमडीसी की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
नवनीत चांद ने कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद 26 वर्षों में बस्तर में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन विकास का वास्तविक लाभ स्थानीय जनता तक कितना पहुंचा, इसका स्पष्ट हिसाब सामने आना चाहिए। उन्होंने एनएमडीसी से स्थानीय युवाओं की भर्ती, नियमित रोजगार, ठेका श्रमिकों और स्थानीय कारोबारियों को मिले अवसरों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।
एनएमडीसी की परियोजनाओं से जुड़े रोजगार और स्थानीय भागीदारी पर सवाल उठाते हुए नवनीत चांद ने पूछा कि स्थानीय युवाओं को कितनी नियमित नौकरियां मिलीं, कितने पद रिक्त हैं और ठेका श्रमिकों की स्थिति क्या है? स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय में प्राथमिकता देने के दावों पर भी पारदर्शी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल उत्पादन और निवेश के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। इसकी असली कसौटी यह है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और क्षेत्र को बेहतर बुनियादी सुविधाएं कितनी मिलीं। एनएमडीसी को इन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे, आजीविका और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई है। नवनीत चांद ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, पेड़ कटाई, पर्यावरणीय स्वीकृति और ग्रामसभा की वैधानिक भूमिका से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए। प्रभावित परिवारों को मिले लाभ और लंबित मामलों का विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने एनएमडीसी और नगरनार स्टील प्लांट सहित औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय रोजगार, ठेका व्यवस्था तथा स्थानीय कारोबारियों की भागीदारी का तुलनात्मक ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।
नवनीत चांद ने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, बिजली और सिंचाई जैसी सुविधाओं की स्थिति का भी आकलन जरूरी है। जनजातीय कल्याण योजनाओं के बजट और उनके जमीनी परिणामों की समीक्षा के साथ पेसा और वन अधिकार कानून के प्रावधानों के पालन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बस्तर के संसाधनों से उद्योगों को लाभ मिल रहा है, तो स्थानीय जनता को मिले लाभ का हिसाब भी सामने आना चाहिए। एनएमडीसी को स्थानीय भर्ती, ठेका श्रमिकों, पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों के आंकड़े सार्वजनिक कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि बस्तर के विकास में उसकी भूमिका का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक किस हद तक पहुंचा है।