Pilot Career in India : भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इसका योगदान देश की अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ता जा रहा है। इस क्षेत्र में हजारों नौकरियों के अवसर मौजूद हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पायलट बनना आज के युवाओं के लिए एक आकर्षक करियर विकल्प बन गया है।
अगर आप भी कॉकपिट में बैठकर विमान उड़ाने का सपना देखते हैं, तो इसके लिए जरूरी योग्यता और प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। पायलट बनने के लिए उम्मीदवार का 12वीं कक्षा मैथ्स और फिजिक्स विषय के साथ पास होना अनिवार्य है और न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। जो छात्र आर्ट्स या कॉमर्स से हैं, वे भी ओपन बोर्ड के जरिए मैथ्स और फिजिक्स पास कर इस क्षेत्र में आ सकते हैं।
पायलट बनने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए DGCA द्वारा अधिकृत डॉक्टर से मेडिकल टेस्ट पास करना होता है। इसके बाद उम्मीदवार को कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की परीक्षा पास करनी होती है, जो साल में कई बार आयोजित होती है। इस परीक्षा के बाद दो तरह की ट्रेनिंग दी जाती है- ग्राउंड ट्रेनिंग और फ्लाइंग ट्रेनिंग।
ग्राउंड ट्रेनिंग में मौसम विज्ञान, नेविगेशन, एयर रेगुलेशन और तकनीकी विषय पढ़ाए जाते हैं, जिसमें कम से कम 70 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होता है। इसके बाद फ्लाइंग ट्रेनिंग में लगभग 200 घंटे तक विमान उड़ाने का अनुभव दिया जाता है, जो करीब 14 से 15 महीने में पूरा होता है।
ट्रेनिंग का खर्च भारत में करीब 50 से 55 लाख रुपये तक हो सकता है, जो संस्थान और देश के अनुसार बदल सकता है। कई एयरलाइन कंपनियां भी पायलट ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाती हैं, जहां से सीधे करियर की शुरुआत का मौका मिल सकता है।
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शुरुआती सैलरी 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है। वहीं, अनुभव बढ़ने के साथ कैप्टन पद पर पहुंचने के बाद यह सैलरी 4 से 8 लाख रुपये प्रति माह तक हो जाती है। इस तरह एविएशन सेक्टर न केवल सम्मानजनक बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत करियर विकल्प साबित हो रहा है।