इंडोनेशिया से पिछड़ा भारत (AI जेनरेटेड इमेज)
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Explainer: एशिया के अन्य बाजारों से पिछड़ा भारत, शेयर मार्केट में गिरावट की वजह क्या? सर्वे में बड़ा खुलासा

Indian Share Market: बैंक ऑफ अमेरिका ने भारतीय शेयर बाजार को मई में सबसे कम पसंदीदा बाजार बताया था। उस वक्त अमेरिक-ईरान संघर्ष के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ा था।

मनोज आर्या

Why Indian Share Market Decline: पिछले दो साल से सुस्त प्रदर्शन के बाद निवेशकों और मार्केट के जानकारों को उम्मीद थी कि यह साल यानी 2026 घरेलू शेयर बाजार के लिए वापसी का साल होगा। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। भारतीय शेयर बाजार कभी तेजी से बढ़ रहा था। हालांकि, पिछले कुछ सालों में निवेशकों का भरोसा कम होता दिख रहा है। भारत का शेयर बाजार एशिया के अन्य बाजारों से पिछड़ा गया।

एक्सपर्ट्स का माना है कि इसके पीछे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश के अवसर तलाश रहे निवेशक भारत में ऐसी कंपनियों की कमी से निराश हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि वे लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अन्य देशों के बाजारों में निवेश कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की कुल निकासी

सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी एनएसडीएल के मुताबिक, इस साल विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार से 26.4 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है। इसके चलते इसी साल मई महीने में स्टॉक मार्केट वैल्युएशन के लिहाज से भारत वैश्विक स्तर पर पांचवें नंबर से फिसलकर सातवें नंबर पर आ गया था। लेकिन, चीजें यहीं तक स्थिर नहीं रहीं। अब बैंक ऑफ अमेरिका के फंड मैनेजरों के सर्वे में भारत इंडोनेशिया से भी पिछड़ गया है। भारत अब इंडोनेशिया से भी ज्यादा एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है।

कमजोर इकोनॉमिक ग्रोथ बड़ी चिंता

यह ऐसे समय में हुआ है, जब भारत का शेयर बाजार इस साल दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले मार्केट में शामिल है। भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन से निवेशकों में चिंता बढ़ रही है। सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयरों को लेकर सबसे बड़ी चिंता एआई से संबंधित कंपनियों में कमी है। इसके अलावा कमजोर इकोनॉमिक ग्रोथ सबसे बड़ी चिंता के रूप में उभरी है।

इंडोनेशिया से पिछड़ा भारत

सर्वे में हिस्सा लेने वाले 32 प्रतिशत फंड मैनेजरों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी कम करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। वहीं सुधारों में कमी और शेयरों की हाई प्राइस भी निवेशकों के नकारात्मक रूख की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।

भारत के मुकाबले इंडोनेशिया ज्यादा पसंदीदा

भारत की तुलना में इडोनेशिया को लेकर निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है। जुलाई में जहां, 32 प्रतिशत फंड मैनेजर इंडोनेशियाई बाजार में हिस्सेदारी कम करने की बात कर रहे थे, वहीं, अगस्त में यह आंकड़ा घटकर 27 प्रतिशत रह गया। ताइवान और जापान अब भी निवेशकों के लिए पसंदीदा बाजार बने हुए हैं। 7 से 13 अगस्त के बीच हुए इस सर्वें में 272 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाले कुल 98 फंड मैनेजर शामिल हुए।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे के नतीजे पिछले दो हफ्ते में भारतीय शेयरों में आई गिरावट से मिलते-जुलते नजर आ रहे हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कंपनियों की कमाई के अनुमान में सुधार हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि मजबूत होते फंडामेंटल्स के बावजूद भी निवेशक भारतीय बाजार को लेकर सतर्क हैं।

अनुमान से बेहतर निफ्टी का प्रदर्शन

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पहली छमाही में बंपर निकासी के बाद इस क्वार्टर में ग्लोबल फंडों ने घरेलू शेयरों में चार अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है, जो क्षेत्र के ऊभरते बाजारों में सबसे अधिक है। NSE निफ्टी-50 में शामिल कंपनियों की कमाई हाल के तीन महीने में पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी बढ़ी है। जबकि मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का अनुमान केवल 10 प्रतिशत ग्रोथ का था।

तेल की बढ़ती कीमतों का बाजार पर असर

बैंक ऑफ अमेरिका ने अपने सर्वे में भारतीय शेयर बाजार को मई में सबसे कम पसंदीदा बाजार बताया था। उस वक्त अमेरिक-ईरान संघर्ष के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ा था। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को देखते हुए ईंधन की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। एनएसई निफ्टी-50 मार्च के हालिया निचले स्तर से आठ फीसदी चढ़ चुका है, लेकिन इस साल यह अब भी एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों मे दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बाजार है।

तेल की बढ़ती कीमतों का बाजार पर असर

2026 की शुरुआत से लेकर अब तक इसमें 8 फीसदी गिरावट आई है। इसके साथ ही भारतीय बाजार के लागातर 10 साल की वार्षिक बढ़त के ऐतिहासिक सिलसिले के टूटने की संभावना भी बढ़ गई है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया को लेकर बेहतर होते निवेशक सेंटीमेंट की वजह उसे जकार्ता कंजोपिट इंडेक्स में जून के निचले स्तर से 20 फीसदी से अधिक तेजी है।

'भारत में निवेश का कोई AI थीम नहीं'

क्वांटम एडवाइजर्स इंडिया के मुख्य निवेश रणनीतिकार अरविंद चारी ने जून में कहा था कि ग्लोबल इंवेस्टर्स थीम के बेस पर निवेश करते हैं। अगर आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक निवेश थीम के रूप में देखना चाहते हैं, तो भारत में फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने इस साल की शुरुआत से भारत के बड़े आईटी सर्विसेज सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक घटा दी है। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक इस चिंता को लेकर सतर्क हैं कि एआई उस इंडस्ट्री को किस तरह प्रभावित कर सकता है, जो भारत में सबसे बड़ा व्हाइट-कॉलर रोजगार देने वाला सेक्टर है।

भारत की चैटजीपीटी या क्लाउड जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल्स में कोई बड़ी मौजूदगी नहीं है और देश में चिप निर्माण की भी कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं है। इसके अलावा, भारत अपनी जरूत का लगभग 90 फीसदी एनर्जी दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है। मॉर्गन स्टैनली ने जून में कहा था कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोई निवेश का अवसर नहीं होना बाजार के लिए बड़ी चुनौती है। एआई की वजह से भारतीय सर्विसेज एक्सपोर्ट पर संभावित असर स्थिति को और मुश्किल बना रहा है।

विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 36% घटा

NSDL के डेटा के मुताबिक, टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों वाले भारत के आईटी सेक्टर में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 2026 की शुरुआत के 60 अरब डॉलर से लुढ़कर 15 मई तक केवल 38 अरब डॉलर बच गई है, जो कि 36 फीसदी से ज्यादा के गिरावट को दर्शाता है। इसी अवधि के दौरान घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 15 प्रतिशत घटकर 701 अरब डॉलर रह गई।

RBI के पूर्व गवर्नर ने क्या कहा?

आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि टेक्नोलॉजी के मामले में भारत पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक दुनिया भर में बेहतर मौकों की तलाश में भारत से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों की ओर बढ़ गए। वैश्विक स्तर पर पूंजी अब तकनीक-आधारित अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर एआई, बायोटेक और डेटा सेंटर की ओर आकर्षित हो रही है।

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