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देश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार के अलावा प्रमुख डेयरी कंपनियां भी किसानों के लिए फैसले ले रही हैं।
इसी दिशा में गुजरात की प्रमुख बनास डेयरी ने गोबर खरीद योजना शुरू की है।
Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026: देदेश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार के अलावा प्रमुख डेयरी कंपनियां भी किसानों के हित में कई फैसले ले रही हैं। इसी दिशा में बनास डेयरी ने भी एक नई स्कीम की शुरुआत की है, जिसका नाम है बनास डेयरी गोबर खरीद योजना।
इस योजना के जरिए किसानों को दूध के साथ-साथ गोबर बिक्री से भी अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है। किसानों के लिए यह योजना काफी कारगर साबित हो रही है। आईए बनास डेयरी गोबर खरीद योजना 2026 के बारे में सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
गुजरात स्थित बनास डेयरी ने फरवरी 2020 में बनासकांठा जिले के दामा गांव से किसानों से गोबर खरीदने की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत 1 रुपये प्रति किलो के भाव से गोबर की खरीदारी होती है। सबसे राहत की बात यह है कि गोबर बेचने के लिए किसानों और पशुपालकों को दूर जानें की जरूरत नहीं होती।
बनास डेयरी खुद घर या फॉर्म से गोबर की खरीदारी करती है और इसका पेमेंट दूध के पैसे के साथ हर 15 दिन में सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। हालांकि, यह सुविधा संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध होने और डेयरी की खरीद व्यवस्था पर निर्भर करती है।
किसानों और पशुपालकों से खरीदा हुआ गोबर का इस्तेमाल बायो-सीएनजी बनाने में इस्तेमाल किया जााता है। इस प्रोसेस में गोबर से गैस बनाया जाता है, जिसाक इस्तेमाल वहानों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से गोबर को एक उपयोगी एनर्जी में बदला जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बनास डेयर की चार प्लांट में हर होज करीब 340 टन गोबर से ईंधन बनाने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा धराद और राधनपुर में दो नए प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिसका शिलन्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को करने वाले हैं।
बता दें कि गोबर के इस्तेमाल से सिर्फ बायो-सीएनजी ही नहीं, बल्कि गैस तैयार होने के बाद बचने वाले पदार्थ से जैविक खाद का उत्पादन भी किया जाता है। बनास डेयरी इस जैविक खाद को भूमि अमृत के नाम से स्थानीय दुग्ध समितियों के जरिए किसानों तकह पहुंचाती है।
किसान इस जैविक खाद का इस्तेमाल अपने खेत और फसलों के लिए करते हैं। बनास डेयरी की इस खास पहल से अनउपयोगी समझा जाने वाला गोबर, ईंधन और खाद जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने अहम भूमिका निभा रहा है।