Share Market Crash News: AI की दुनिया में पिछले दो साल से बहुत ही भारी उत्साह था और निवेशकों ने इसमें खूब पैसा लगाया था। 22 जून को अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे AI सेक्टर को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया। गूगल के दो बेहतरीन एआई वैज्ञानिकों के कंपनी छोड़ने के ऐलान के बाद बाजार में घबराहट फैल गई। इसी वजह से टेक कंपनियों के शेयर बहुत बुरी तरह से टूट गए और निवेशकों का अरबों डॉलर डूब गया।
इस घटना के बाद अल्फाबेट के मार्केट कैप से कमोबेश 270 अरब डॉलर बहुत ही तेजी के साथ साफ हो गए। इसके साथ ही एनवीडिया को भी 200 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेजन के शेयर लगभग 5 प्रतिशत नीचे आ गए और मेटा के शेयरों में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। स्पेसएक्स के शेयरों में भी 22 जून को करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जिससे एलॉन मस्क को झटका लगा।
कहानी की शुरुआत तब हुई जब 16 जून को गूगल के सबसे काबिल रिसर्चर नोम शजीर ने ओपन एआई में जाने का बड़ा ऐलान किया। इसके बाद 19 जून को दूसरे बड़े वैज्ञानिक जॉन जंपर ने भी एंथ्रॉपिक कंपनी जॉइन करने का अहम फैसला ले लिया। 22 जून को जब शेयर बाजार खुला तो निवेशकों ने अल्फाबेट के शेयरों को बेचना शुरू कर दिया जिससे कंपनी के शेयर 7.2 प्रतिशत तक टूट गए। इन दोनों के अचानक जाने से निवेशकों का गूगल पर भरोसा डगमगा गया और उन्होंने भारी बिकवाली की।
नोम शजीर और जॉन जंपर एआई इंडस्ट्री के उन बहुत ही चुनिंदा वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं जिनकी रिसर्च पर पूरी तकनीक टिकी है। नोम शजीर 2017 के ऐतिहासिक ट्रांसफॉर्मर रिसर्च पेपर के को-राइटर थे जो आज के कई बड़े एआई मॉडलों की सबसे मजबूत नींव है। गूगल ने शजीर को वापस लाने के लिए दो साल पहले 2.7 बिलियन डॉलर खर्च किए थे इसलिए उनका जाना एक बड़ा झटका था। इससे बाजार में एक गलत संदेश गया कि शायद गूगल अब एआई की इस रेस में पिछड़ रहा है।
असल चिंता सिर्फ इन दो वैज्ञानिकों के जाने की नहीं है बल्कि पूरी एआई इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल पर अब सवाल उठ रहे हैं। निवेशकों को इस बात का डर सताने लगा है कि क्या यह पूरी तकनीक सिर्फ कुछ गिने-चुने लोगों के भरोसे ही चल रही है। अगर भविष्य में ऐसे ही टैलेंट एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाते रहे तो क्या शेयर बाजार में इसी तरह का भारी नुकसान होता रहेगा। दूसरी तरफ जिन प्राइवेट कंपनियों में ये लोग गए हैं उनके शेयर मार्केट में लिस्टेड न होने के कारण उन पर कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ।
इस घटना ने निवेशकों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई पर खर्च तो लगातार बढ़ रहा है लेकिन कमाई कहां है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कई बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर खर्च करके बड़े एआई मॉडल और डेटा सेंटर लगातार बना रही हैं। लेकिन अभी तक एआई से उतनी कमाई बिल्कुल भी नहीं हो रही है जितनी कि बाजार और निवेशकों ने बहुत पहले उम्मीद की थी। इस वजह से बाजार अब सिर्फ एआई की संभावनाओं पर ही नहीं बल्कि उसके असली मुनाफे पर भी गहरे सवाल पूछने लगा है।