RBI MPC Meeting Decision October 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) में कड़ा फैसला लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद देश में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2023 के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में की गई यह पहली बढ़ोतरी है, जिससे अप्रैल, जून और अगस्त की बैठकों से चला आ रहा स्थिरता का दौर खत्म हो गया है।
रिजर्व बैंक के इस फैसले का सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में इजाफा होगा, जिससे मासिक किस्तें (EMI) महंगी हो जाएंगी। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के चलते क्रूड ऑयल का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना और अगस्त में खुदरा महंगाई (CPI) का बढ़कर 4.82% होना चिंता का मुख्य कारण रहा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी। इसके साथ ही नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।
आरबीआई ने फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच यह कदम उठाया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंक से कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा होने के कारण होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर ग्राहकों की मासिक EMI पर देखने को मिल सकता है।
मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान RBI ने अन्य नीतिगत दरों में भी बदलाव किया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया गया है।
जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत पर समायोजित किया गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर महंगाई में दोबारा तेजी आने की आशंका बनी हुई है।
तो वहीं एक तरफ महंगाई के ताजा आंकड़े भी RBI की चिंता बढ़ा रहे हैं। अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी।
इसके अलावा अल नीनो प्रभाव और कम बारिश के कारण रबी फसल के उत्पादन पर भी जोखिम बना हुआ है। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए RBI ने रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया है।