Latest India Forex Reserve: भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति समिति की अहम बैठक के बाद बहुत ही शानदार और सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। इन नई रिपोर्टों के अनुसार भारी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था बहुत ही मजबूत स्थिति में बनी हुई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है जो भारत की आर्थिक स्थिरता को पूरी तरह से दर्शाता है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि देश का वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार 682.2 अरब डॉलर के भारी और मजबूत स्तर पर है। यह बड़ा भंडार लगभग 11 महीने के आयात की सभी जरूरतों को बहुत आसानी से पूरा कर सकता है। इसके अलावा यह देश के कुल बाहरी ऋण के 89 प्रतिशत से भी अधिक हिस्से को कवर करने में पूरी तरह सक्षम है।
गवर्नर ने साफ कहा है कि रिजर्व बैंक रुपए की कीमत का कोई विशेष स्तर तय नहीं करता है। रुपए की विनिमय दर को बाजार की शक्तियों के आधार पर ही तय होने दिया जाता है। हालांकि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होने पर बैंक स्थिति को नियंत्रित करता है।
पश्चिम एशिया के भारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर दुनिया भर के बाजारों पर है। इसका प्रभाव भारत की विकास दर और महंगाई के अनुमानों पर भी देखा जा सकता है। इन चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बहुत मजबूती से आगे बढ़ रही है।
आरबीआई बाजार में पूरी तरह से स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत ज्यादा सतर्क रहता है। बैंक सभी उपलब्ध नियामकीय और बाजार आधारित साधनों का खुलकर इस्तेमाल करने को तैयार है। केंद्रीय बैंक ऐसी नीतियां बना रहा है जो देश की आर्थिक बुनियाद को और मजबूत कर सकें।
बैंक ने विदेशी पूंजी निवेश को तेजी से बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। फुली एक्सेसिबल रूट में अब 15, 30 और 40 साल की सरकारी प्रतिभूतियां शामिल की गई हैं। पहले इस व्यवस्था में केवल 10 वर्ष तक की अवधि वाली प्रतिभूतियां ही शामिल थीं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले वाणिज्यिक उधार को अब प्रोत्साहित किया जाएगा।
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इसके लिए 13 सितंबर 2026 तक एक नई रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह काफी ज्यादा और बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा। आरबीआई ने अपनी सभी प्रमुख ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के बिल्कुल अपरिवर्तित रखा है। इसके साथ ही बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी पूरी तरह से तटस्थ बनाए रखा है। यह कदम देश के घरेलू विकास और बाजार की मांग में बैंक के भारी विश्वास को दिखाता है।