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होर्मुज खुलते ही गिरी तेल-गैस की कीमतें, 49 दिन बाद ग्लोबल मार्केट में भारी हलचल, अब सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?

Oil Gas Prices Crash: ईरान ने 49 दिनों के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया है। जिसके बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 11% की भारी गिरावट आई है।

अमन उपाध्याय

Oil Gas Prices Crash Strait Of Hormuz: वैश्विक ऊर्जा बाजार और विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत सुखद खबर सामने आई है। ईरान ने पूरे 49 दिनों की नाकेबंदी के बाद शुक्रवार को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने घोषणा की कि युद्धविराम की शेष अवधि के दौरान इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से बहाल रहेगी।

11% तक टूटे दाम

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के ऐलान के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक कच्चा तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) लगभग 11% गिरकर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 11.4% टूटकर 83.89 डॉलर पर पहुँच गया। इसके अतिरिक्त, यूरोप के बेंचमार्क गैस कॉन्ट्रैक्ट में भी करीब 8.5% की कमी आई है।

भारत के लिए क्यों है यह 'संजीवनी'?

भारत के लिए होर्मुज का खुलना किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40-50% हिस्सा (लगभग 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन) इसी मार्ग से आता है। युद्ध और नाकेबंदी के कारण मार्च 2026 में भारत का तेल आयात 15% तक घट गया था, जिससे ऊर्जा सुरक्षा पर संकट मंडराने लगा था। विशेष रूप से रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जो 90% से गिरकर महज 40% रह गई थी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा असर

आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की गिरावट भारत के वार्षिक तेल आयात बिल को 1.5-2 अरब डॉलर तक कम कर सकती है। वर्तमान गिरावट के बाद देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर दबाव कम होने की प्रबल संभावना है, जिससे आम जनता को महंगाई से राहत मिल सकती है।

ट्रंप का शांति संदेश

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए जल्द ही कोई ठोस समझौता हो सकता है। हालांकि इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है, लेकिन उनकी इस टिप्पणी ने ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद जगा दी है।

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