

USA Scientists Missing UFO Mystery: अमेरिका में इन दिनों एक ऐसी रहस्यमयी घटनाक्रम चल रहा है, जिसने हॉलीवुड की किसी थ्रिलर फिल्म की याद दिला दी है। देश के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील क्षेत्रों जैसे यूएफओ (UFO) रिसर्च, परमाणु सुरक्षा और डीप स्पेस प्रोजेक्ट्स से जुड़े वैज्ञानिक और उच्चाधिकारी एक-एक कर गायब हो रहे हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, बल्कि व्हाइट हाउस को भी इस पर सार्वजनिक सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक महत्वपूर्ण बैठक से निकलने के बाद ट्रंप ने कहा कि यह मामला 'बहुत गंभीर' है और सरकार इसकी गहनता से जांच कर रही है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह सब महज एक संयोग हो सकता है लेकिन उन्होंने एक समयसीमा तय करते हुए कहा कि अगले डेढ़ हफ्ते के भीतर पूरी सच्चाई दुनिया के सामने होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2023 से अब तक कम से कम 10 वैज्ञानिक और अधिकारी लापता हो चुके हैं या उनकी संदिग्ध मौत हो चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी लोग उन क्षेत्रों में काम कर रहे थे जिनका सीधा संबंध देश की सुरक्षा और भविष्य की तकनीकों से था। इसमें एलियन गतिविधियों से जुड़ी रिसर्च और परमाणु हथियारों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी पुष्टि की है कि यदि ये रिपोर्ट सही हैं तो सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जांच कराएगी।
इस मामले ने तब और अधिक तूल पकड़ लिया जब रिटायर्ड एयरफोर्स जनरल विलियम नील मैककैसलैंड न्यू मैक्सिको स्थित अपने घर से अचानक गायब हो गए। उनकी पत्नी के अनुसार, वह बिना अपना फोन, चाबी या कोई अन्य जरूरी सामान लिए घर से निकले थे।
दिलचस्प बात यह है कि वह अपने साथ सिर्फ एक पिस्तौल लेकर गए थे और उनके व्यवहार से ऐसा लग रहा था जैसे वह खुद को किसी से छिपाना चाहते हों। मैककैसलैंड का संबंध एयरफोर्स रिसर्च लैब से रहा है जिसका नाम अक्सर रोसवेल और यूएफओ जैसी रहस्यमयी घटनाओं से जोड़ा जाता है।
इन घटनाओं को लेकर अब अमेरिका में साजिश की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपब्लिकन सांसदों ने इस मामले में एफबीआई (FBI) जांच की मांग की है। आशंका जताई जा रही है कि इन वैज्ञानिकों के पास मौजूद संवेदनशील जानकारी रूस, चीन या ईरान जैसे देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया धीमी रही है, जबकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।