जीएसटी में बदलाव से सरकार को कितन नुकसान, (कॉन्सेप्ट फोटो) 
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GST रिफॉर्म से ₹48,000 करोड़ का नुकसान, ऐसा सरकार का दावा; लेकिन इस रिपोर्ट ने खोल दी पोल

GST 2.0: केंद्र सरकार का दावा है कि जीएसटी दरों में हुई कटौती से 48,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। हालांकि, आज SBI ने अपनी रिपोर्ट में जो आंकड़े दिए हैं, वो काफी अलग है।

मनोज आर्या

GST 2.0: केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को जीएसटी में हुए बड़े बदलाव को लेकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बैंक ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती की वजह से सरकार के राजस्व में कम से कम 3,700 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। सरकार का अनुमान है कि जीएसटी दरों को सरल बनाने का शुद्ध राजकोषीय प्रभाव वार्षिक आधार पर 48,000 करोड़ रुपये होगा।

भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, विकास और उपभोग में वृद्धि को देखते हुए न्यूनतम राजस्व नुकसान 3,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसका राजकोषीय घाटे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह नुकसान सरकार के 48,000 करोड़ रुपये के दावे से काफी कम है।

बैकिंग सेक्टर पर सकारात्मक प्रभाव

कुछ दिन पहले हुई जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में मौजूदा चार-स्तरीय ढांचे को दो-स्तरीय ढांचे से बदल दिया गया है। इसमें 18 प्रतिशत एवं पांच प्रतिशत की मानक दर और कुछ चुनिंदा वस्तुओं तथा सेवाओं पर 40 प्रतिशत की टैक्स रेट को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने से लागत दक्षता में सार्थक सुधार के कारण बैंकिंग क्षेत्र पर काफी हद तक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे प्रभावी भारित औसत दर भी 2017 में लागू होने के समय 14.4 प्रतिशत से घटकर 9.5 प्रतिशत हो गई है। जीएसटी लागू में वर्तमान में 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की चार दरें हैं।

खुदरा महंगाई में गिरावट का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया कि चूंकि आवश्यक वस्तुओं (लगभग 295) की जीएसटी दर युक्तिकरण 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत या शून्य हो गई है, इसलिए चालू वित्त वर्ष 2025-26 में इस श्रेणी में सीपीआई महंगाई भी 0.25 प्रतिशत से 0.30 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसमें कहा गया कि कुल मिलाकर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 2026-27 तक 0.65 प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत अंकों के बीच नियंत्रित रह सकती है।

अच्छी स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय इकोनॉमी ने वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत पहले ही किसी भी अनुमान से कहीं बेहतर की है, अप्रैल-जून में जीडीपी ग्रोथ रेट 5  तिमाहियों के हाई लेवल 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। बुधवार को जीएसटी दरों में की गई कटौती से निजी खपत में वृद्धि की उम्मीद है, जो अप्रैल-जून में 7 प्रतिशत बढ़ी थी। हालांकि, यह एक साल पहले की 8.3 प्रतिशत वृद्धि दर से कम थी, लेकिन जनवरी-मार्च की 6 प्रतिशत वृद्धि दर से ज़्यादा थी। आरबीआई को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5 प्रतिशत रहेगी।

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