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IATA के जनरल डायरेक्टर ने की अपील, टैक्स पॉलिसी को लेकर दिया बड़ा बयान

एविएशन सेक्टर से जुड़ी आईएटीए के डायरेक्टर जनरल विली वॉल्श ने भारत की टैक्स पॉलिसी को लेकर अपना मत साझा किया है। उन्होंने कहा है कि भारत में टैक्सेशन काफी जटिल है।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली : ग्लोबल एविएशन कंपनियों के ग्रुप आईएटीए ने मंगलवार को अपनी एजीएम में भारत की टैक्स पॉलिसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। आईएटीए ने कहा है कि भारत की टैक्स पॉलिसी काफी कॉम्प्लिकेटेड है और देश में तेजी से बढ़ रहे सिविल एविएशन मार्केट की कैपेसिटी के इस्तेमाल के लिए इसे और ज्यादा विश्वसनीय बनाने की जरूरत है।

आईएटीए के डायरेक्टर जनरल विली वॉल्श ने कहा कि भारत उन सिविल एविएशन मार्केट्स में से एक है, जहां ग्रोथ के काफी अवसर हैं और इसकी ग्रोथ रेट चीन से आगे निकलने की उम्मीद है। हाल के दिनों में विदेशी एविएशन कंपनियों को मिले टैक्स नोटिस के संदर्भ में, वॉल्श ने कहा है कि भारत में टैक्स सिस्टम काफी जटिल है और यह हमारे इंडस्ट्री के लिए एक ओर से ‘विशेषता' बन गयी है यानी यह कोई नया मुद्दा नहीं है।

वॉल्श ने कहा कि देश को पूरी कैपेसिटी का उपयोग करने और इस दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के लिए टैक्सेशन के मुद्दों का समाधान करना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में पीटीआई-भाषा के एक सवाल के जवाब में कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि आपको टैक्सेशन को खत्म करना होगा, लेकिन मुझे लगता है कि आपको इस बारे में साफ समझ होनी चाहिए कि टैक्सेशन रूल्स कैसे लागू होते हैं।

इस मुद्दे पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि एविएशन कंपनियों को कभी-कभी मौजूदा नियम की एक नई व्याख्या मिलती है जो पहले की व्याख्या से पूरी तरह अलग होती है। ऐसी स्थिति में टैक्स के लिए दावा किया जाता है जो भुगतान नहीं किया गया है और यह लंबे समय तक कानूनी विवाद और चर्चाओं की ओर ले जाता है जो अंततः हल हो जाती है। कई मामलों में यह एयरलाइन के पक्ष में जाता है। उन्होंने कहा है कि यदि भारत को असल में यहां मौजूद विशाल अवसर का उपयोग करना है, तो टैक्सेशन के बारे में ज्यादा निश्चितता महत्वपूर्ण होगी।

अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ यानी आईएटीए एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट सहित 350 से ज्यादा एविएशन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। समूह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में एयरपोर्ट के ज्यादा ड्यूटी होने के बारे में भी मुखर रहा है।

वॉल्श ने इस मुद्दे पर आईएटीए के नजरिए को साफ करते हुए कहा कि एविएशन कंपनियां किफायती कीमत पर कुशल हवाई अड्डा संचालन चाहती हैं। हम चाहते हैं कि एयरपोर्ट विवेकपूर्ण तरीके से लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट करें जिसे इंडस्ट्री वहन कर सके।

वॉल्श के अनुसार, एयरलाइन कंपनियों और एयरपोर्ट के बीच ज्यादा बातचीत की जरूरत है। आईएटीए ने अपनी वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम 1 से 3 जून तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई। यह बैठक 42 साल में पहली बार भारत में हुई।

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