(प्रतीकात्मक तस्वीर) 
बिज़नेस

अब सपनों का घर बनाना होगा सस्ता, GST रेट कटौती से 4.5% लागत होगी कम; रिपोर्ट का दावा

GST 2.0: कंस्ट्रक्शन में सीमेंट सबसे महत्वपूर्ण लागत घटकों में से एक है, जो कच्चे माल के खर्च का 25-30 प्रतिशत होता है, इस कटौती से डेवलपर मार्जिन में सुधार और परियोजना लागत में कमी आने की उम्मीद है।

मनोज आर्या

GST Reform: कंस्ट्रक्शन मटेरियल पर जीएसटी कम होने से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत मिल सकती है और इससे कंस्ट्रक्शन की लागत में 3.5 से 4.5 प्रतिशत की कमी आ सकती है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में बताया गया कि इससे डेवलपर्स के मार्जिन को समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता भी बढे़गी। वहीं, अगर बिल्डर्स इसे घर खरीदारों को भी ट्रांसफर करते हैं तो अफोर्डेबिलिटी में भी इजाफा होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, कंस्ट्रक्शन में सीमेंट सबसे महत्वपूर्ण लागत घटकों में से एक है, जो कच्चे माल के खर्च का 25-30 प्रतिशत होता है, इस कटौती से डेवलपर मार्जिन में सुधार और परियोजना लागत में कमी आने की उम्मीद है।

12 प्रतिशत की जगह अब 5 प्रतिशत टैक्स

डेवलपर्स के लिए एक अन्य प्रमुख लागत घटक स्टील पर टैक्स 18 प्रतिशत पर कोई बदलाव नहीं है बना हुआ है। हालांकि, संगमरमर और ट्रैवर्टीन ब्लॉक, ग्रेनाइट ब्लॉक और रेत चूना ईंटों पर टैक्स को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे विशेष रूप से मध्यम श्रेणी और प्रीमियम परियोजनाओं को राहत मिलेगी, जहां इन सामग्रियों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कटौती से डेवलपर मार्जिन में सुधार होने और परियोजना लागत कम होने की भी उम्मीद है, क्योंकि निर्माण सामग्री आमतौर पर बिल्डरों के लिए कुल निर्माण लागत का 50-60 प्रतिशत होती है। रिपोर्ट के अनुसार, सीमेंट पर जीएसटी में 10 प्रतिशत की कमी से कुल निर्माण लागत में 3.0-3.5 प्रतिशत की बचत होने का अनुमान है।

रियल एस्टेट सेक्टर को राहत की उम्मीद

इसके अलावा, संगमरमर, ग्रेनाइट और संबंधित इनपुट पर दर संशोधन से अतिरिक्त 0.5-1.0 प्रतिशत की बचत होगी। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण सामग्री पर जीएसटी सुधार से रियल एस्टेट क्षेत्र को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि संपत्ति पर लागू दरें अपरिवर्तित रहेंगी, जो कराधान में स्थिरता का संकेत देती हैं। नई जीएसटी दरें 22 सितंबर से पूरे देश में लागू होंगी।

डेरी सेक्टर में भी आएगी तेजी

जीएसटी सुधारों से देश के डेयरी सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक और उत्पादन क्षमता को बूस्ट मिलेगा। इसके साथ ही 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को इससे फायदा होगा। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई। 56वीं जीएसटी काउंसिल ने भारत के डेयरी क्षेत्र में दुग्ध और दुग्ध उत्पादों पर टैक्स में भारी कटौती की है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जिसका उत्पादन 2023-24 में 239 मिलियन टन था, जो वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 24 प्रतिशत है।

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