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महंगे कच्चे तेल का झटका! विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में शेयर बाजार से निकाले ₹53,337 करोड़

FPI in Indian Share Market: महंगे कच्चे तेल और बाजार में कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारी बिकवाली की। एफपीआई ने ₹53,337 करोड़ की निकासी की।

मनोज आर्या

Highlights:

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से विदेशी निवेशकों का रुझान बिकवाली का बना हुआ है।

  • विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार अपना पैसे निकाल रहे हैं।

  • अक्टूबर में अब तक FPI की कुल बिक्री 53,337 करोड़ रुपये रही है।

FPI Sold Shares worth Rupees 53,337 Crore in October: कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहने से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में रुझान बिकवाली का बना हुआ है। विदेशी निवेशक लगातार इक्विटी से पैसे निकाल रहे हैं। यह बयान एनालिस्ट की ओर से रविवार को दिया गया।

अक्टूबर में अब तक एफपीआई (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स) की कुल बिक्री 53,337 करोड़ रुपये रही है। हालांकि, इस दौरान एफपीआई ने भारतीय आईपीओ बाजार में 5,281 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

लगातार 10वें हफ्ते बिकवाल रहे FPI

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि इस साल एक्सचेंजों के जरिए एफपीआई की कुल बिकवाली 3,69,164 करोड़ रुपये रिकॉर्ड की गई है। इन्वेस्टमेंट फ्लो के मोर्चे पर एफपीआई लगातार 10वें हफ्ते शुद्ध बिकवाल बने रहे। 23 अक्टूबर को समाप्त हुए हफ्ते में एफपीआई ने अपनी बिकवाली काफी कम कर दी और दो दिन तो वे खरीदार भी बन गए।

यूएस बॉन्ड यील्ड में नरमी (10 साल की यील्ड का 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आना), डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मजबूत होकर 94.94 पर पहुंचना और खास तौर पर लार्ज-कैप शेयरों का कम वैल्यूएशन- इन सभी कारकों ने एफपीआई की बिकवाली को कम करने में मदद की है।

FII की बिकवाली में कमी से राहत

आगे चलकर, एफआईआई की बिकवाली में लगातार कमी आना थोड़ी राहत की बात है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और व्यापक बाजार में भारी कमजोरी अभी भी गिरावट का जोखिम बनाए हुए हैं। इस हफ्ते बाजार का एक अहम ट्रेंड मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में आई भारी गिरावट रही।

इस हफ्ते निफ्टी मिड कैप 100 में 5.6 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉल कैप 100 में 7.3 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जबकि निफ्टी 50 ने बेहतर मजबूती दिखाई और इसमें केवल 2.35 प्रतिशत की ही गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में आई इस गिरावट की वजह

जानकारों का मानना ​​है कि व्यापक बाजार में आई इस गिरावट की एक वजह मार्जिन फंडेड लॉन्ग पोजीशन की 'फोर्सड लिक्विडेशन' हो सकती है। लार्ज कैप शेयरों की मजबूती का मुख्य कारण घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) द्वारा इन शेयरों की खरीदारी है, जिनके पास निवेश के लिए काफी फंड मौजूद है। जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

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