

अनंत सिंह के निष्कासन आदेश पर राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सवाल उठाए।
सुधाकर सिंह बोले- अनंत सिंह की राजनीतिक ताकत पर निष्कासन का असर नहीं पड़ेगा।
अनंत सिंह के राजद में शामिल होने की संभावना पर फैसला तेजस्वी यादव पर छोड़ा।
Bihar Politics: मोकामा विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। जदयू के विधान परिषद उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करना अनंत सिंह को भारी पड़ा। अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने निष्कासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने जदयू के कार्यालय आदेश में तकनीकी खामी होने का दावा किया है। वहीं, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अनंत सिंह के पार्टी में शामिल होने की संभावना पर फैसला तेजस्वी यादव पर छोड़ दिया।
राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने अनंत सिंह के निष्कासन से जुड़े कार्यालय आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के संविधान के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
शक्ति सिंह यादव ने यह भी कहा कि किसी मौजूदा विधायक की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष या प्रधान महासचिव की सहमति और निर्देश की भूमिका होती है। हालांकि, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को जदयू का आंतरिक मामला बताया।
शक्ति सिंह यादव ने सवाल उठाया कि जब पहले चार बार अनंत सिंह ने विरोध किया, तब जदयू ने सक्रियता क्यों नहीं दिखाई? उनके मुताबिक, इस बार पार्टी ने तेजी से कार्रवाई की है।
राजद प्रवक्ता ने दावा किया कि जदयू के भीतर कई खेमे हैं और पार्टी में चल रही खींचतान आसानी से खत्म नहीं होगी। उन्होंने पार्टी के अंदर केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह पाने को लेकर भी गुटबाजी होने का आरोप लगाया। ये सभी राजनीतिक आरोप शक्ति सिंह यादव ने लगाए हैं।
बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अनंत सिंह के निष्कासन पर कहा कि इससे उनकी राजनीतिक ताकत पर खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह पहले भी निर्दलीय चुनाव जीतते रहे हैं और जनता ने उन्हें ताकत दी है।
अनंत सिंह के राजद में शामिल होने की संभावना के सवाल पर सुधाकर सिंह ने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में तेजस्वी यादव ही जवाब देंगे।
अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव में जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करते हुए जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार को समर्थन दिया था। इसके बाद जदयू ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
अनंत सिंह को इससे पहले भी जदयू से बाहर किया जा चुका है। साल 2015 में विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी।