

शबरी नेचुरल्स ब्रांड को जापान का प्रतिष्ठित ग्लोबल गुड डिजाइन अवॉर्ड मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इसकी सराहना की।
इस पहल से महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ।
PM Modi Mann Ki Baat Shabari Naturals Maharashtra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में महाराष्ट्र सरकार की अनूठी पहल शबरी नेचुरल्स की जमकर प्रशंसा की है। अपनी आकर्षक पैकेजिंग और पारंपरिक आदिवासी कला की विशिष्ट छाप के दम पर शबरी नेचुरल्स को जापान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित जी-मार्क - ग्लोबल डिजाइन अवॉर्ड हासिल हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की इस पहचान को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों ने शबरी नेचुरल्स के माध्यम से जंगलों के शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादों को आधुनिक बाजार में पेश किया है।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि शबरी नेचुरल्स के शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से निर्मित उत्पादों की पैकेजिंग पर जनजातीय कला की सुंदर झलक देखने को मिलती है। इसी प्रामाणिक पैकेजिंग और सांस्कृतिक सादगी के कारण इसे जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन प्रमोशन द्वारा 4 नवंबर को टोक्यो में 'ग्लोबल गुड डिजाइन अवॉर्ड' से सम्मानित किया जाएगा।
शबरी नेचुरल्स केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के दूरदराज आदिवासी इलाकों में आर्थिक स्वावलंबन और सांस्कृतिक संरक्षण का एक बड़ा आंदोलन है।
स्थापना और विज़न: महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत शबरी आदिवासी वित्त एवं विकास महामंडल मर्यादित (नासिक) ने इस उपक्रम की शुरुआत की थी। इसका मूल उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर आदिवासी संग्रहकर्ताओं, किसानों और कारीगरों को उनके उत्पादों का सही और पूरा हक दिलाना है।
पौराणिक प्रेरणा: रामायण की भक्त शबरी के नाम पर आधारित यह ब्रांड शुद्धता, सेवा और ईमानदारी का प्रतीक है। इसके माध्यम से जंगलों से एकत्र शुद्ध शहद, महुआ के पौष्टिक व्यंजन, अनपॉलिश्ड चावल, रागी, वराई, मसाले, हर्बल उत्पाद और पारंपरिक बांस कलाकृतियां बेची जाती हैं।
पैकेजिंग में बसी आदिवासी कला: इस ब्रांड की सबसे बड़ी खूबी इसकी कलात्मक पैकेजिंग है। डिब्बों और बोतलों पर वारली, गोंड और चित्रकथी जैसी विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक चित्रकलाओं और लोककथाओं को चित्रित किया गया है। यह पैकेजिंग उत्पादों को न केवल प्रीमियम लुक देती है, बल्कि उपभोक्ताओं तक आदिवासी जीवनशैली और पर्यावरण-अनुकूल संदेश भी पहुंचाती है।
शबरी नेचुरल्स की सीधी बिक्री व्यवस्था के कारण उत्पादों की बिक्री दर का लगभग 90 प्रतिशत लाभ सीधे आदिवासी उत्पादकों तक पहुंचता है। नासिक, पालघर, नंदुरबार, धुले और गढ़चिरौली जैसे आदिवासी बहुल जिलों के 1,000 से अधिक आदिवासी उद्यमी और 50 से अधिक शेतकरी उत्पादक कंपनियां (FPO) इससे जुड़ी हुई हैं।
आदिवासी किसान उत्पादक संगठनों को एकजुट कर आदी-शबरी फेडरेशन का गठन किया गया है, जिससे इस पहल को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए और अधिक मजबूती मिली है। वैश्विक स्तर पर जी-मार्क जीतने से पहले शबरी नेचुरल्स को इंडिया डिजाइन मार्क और स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।