केसी नियोगी और हेमवती नंदन बहुगुणा (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Budget 2026: आज निर्मला सीतारमण का नौवां बजट, जानें कौन हैं वे वित्त मंत्री जिन्होंने कभी नहीं पेश किया बजट?

Indian Budget History: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना 9वां बजट पेश कर रही हैं। बजट इतिहास में केसी नियोगी और एचएन बहुगुणा ऐसे दो वित्त मंत्री रहे हैं जिन्हें कभी बजट पेश करने का अवसर नहीं मिला।

प्रिया सिंह

FMs Who Never Presented Budget: आज भारत का केंद्रीय बजट 2026 संसद में पेश किया जा रहा है जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे प्रस्तुत करेंगी। यह उनके कार्यकाल का लगातार नौवां बजट भाषण है जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है और वे एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। इस बजट के साथ वे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के नौ बजट पेश करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी। केंद्रीय बजट के इस महत्वपूर्ण अवसर पर हमें उन ऐतिहासिक तथ्यों को भी जानना चाहिए जो भारतीय बजट के सफर को रोचक बनाते हैं।

इतिहास के वो दो अभागे वित्त मंत्री

भारतीय बजट के लंबे इतिहास में दो ऐसे दुर्लभ मौके आए जब देश के नियुक्त वित्त मंत्री एक भी बजट पेश नहीं कर सके थे। इन मंत्रियों में पहला नाम केसी नियोगी का है जिन्होंने साल 1948 में देश के वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी। वे आजाद भारत के दूसरे वित्त मंत्री थे लेकिन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें अपने पद से हटना पड़ा था।

केसी नियोगी का सबसे छोटा कार्यकाल

केसी नियोगी केवल 35 दिनों के लिए ही वित्त मंत्री के पद पर आसीन रहे थे जिसके कारण उन्हें बजट पेश करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने आरके शणमुखम चेट्टी के बाद यह पद संभाला था लेकिन बजट की तारीख आने से पहले ही उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने कार्यभार संभाला और उन्होंने ही उस समय संसद में देश का बजट पेश किया था।

हेमवती नंदन बहुगुणा की अधूरी पारी

दूसरे वित्त मंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा थे जिन्हें वित्त मंत्री रहने के बावजूद संसद में बजट भाषण पढ़ने का अवसर कभी प्राप्त नहीं हो सका। बहुगुणा साल 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में नियुक्त किए गए थे और कार्यभार संभाला था। उनका कार्यकाल भी नियोगी की तरह छोटा था जो लगभग साढ़े पांच महीने तक ही चला और इस दौरान बजट सत्र नहीं आया।

कार्यकाल और बजट की बड़ी चुनौतियां

इन दोनों दिग्गज नेताओं के कार्यकाल के दौरान बजट की कोई भी निर्धारित तारीख नहीं आई जिसके कारण वे अपनी आर्थिक योजनाएं नहीं रख सके। नियोगी और बहुगुणा दोनों के साथ स्थिति लगभग समान थी क्योंकि उनके इस्तीफे बजट सत्र शुरू होने से पहले ही स्वीकार हो गए थे। यह भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और रोचक घटनाक्रम माना जाता है जिसे आज भी याद किया जाता है।

वर्तमान बजट और महंगाई का बड़ा झटका

आज निर्मला सीतारमण के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं जिनमें राजकोषीय घाटा कम करना और आम मध्यम वर्गीय जनता को बड़ी राहत देना शामिल है। बजट के इस महत्वपूर्ण दिन पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 50 की बढ़ोतरी का एक बड़ा झटका भी देशवासियों को लगा है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक गैस के दाम बढ़ गए हैं जिससे लोगों की जेब पर सीधा बोझ पड़ा है।

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