बजट पूर्व चर्चा की अध्यक्षता कर रहीं केंद्रीय वित्त मंत्री। इमेज-सोशल मीडिया 
बिहार

चुनावी वादे पूरे करने के लिए नीतीश सरकार को चाहिए अधिक कर्ज, मोदी सरकार से क्या हैं मांगें?

Bihar Economy: बिहार के वित्त मंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से राज्य के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की। उन्होंने एसजीडीपी की तुलना में 5% तक ऋण लेने की अनुमति मांगी है।

रंजन कुमार

Bihar Budget Demands: बिहार सरकार को चालू योजनाओं को जारी रखने के साथ अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त धन का प्रबंध करना है। इसके लिए केंद्र से अनुदान के साथ खुले बाजार से अधिक ऋण की अपेक्षा है। बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बजट पूर्व चर्चा के दौरान शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को प्रदेश की अपेक्षाओं से अवगत कराया। उन्होंने बिहार के विकास से संबंधित विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए सकल राज्य घरेलू उत्पाद (SGDP) की तुलना में 2% अतिरिक्त ऋण लेने के लिए अनुमति देने का आग्रह किया।

मंत्री ने यह भी कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के लिए अधिक उधारी की जरूरत है। मतलब बिहार सरकार अब एसजीडीपी की तुलना में 5% ऋण की अपेक्षा रख रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में वर्तमान मूल्य पर एसजीडीपी 1097264 करोड़ अनुमानित है। इसकी तुलना में अधिकतम 3% ऋण के लिए अनुमत‍ि‍ है।

ब्याज रहित ऋण की सीमा 1 लाख करोड़ रुपये करने का अनुरोध

बिजेंद्र ने बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में वर्तमान मूल्य पर 13.09% की विकास दर का हवाला देते हुए कहा कि कल्याणोन्मुखी विकास कार्यक्रमों में तेजी लाने और मानव पूंजी को मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने सात निश्चय के तीसरे चरण की शुरुआत की है। इसके लिए केंद्र से पर्याप्त आर्थिक सहायता चाहिए। उन्होंने ब्याज रहित ऋण की सीमा 50 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट में अतिरिक्त ऋण सीमा के साथ उप-कर (सेस) के विभाज्य कोष में विलय और विशेष बाढ़ राहत पैकेज की भी मांग की। सेस पर अब तक केंद्र का अधिकार है। इसके विभाज्य कोष में विलय के बाद बिहार को अतिरिक्त धन मिलेगा।

सेस और सरचार्ज में हिस्सेदारी की अपेक्षा

मंत्री बिजेंद्र ने कहा कि कुल कर राजस्व में सेस और अधिभारों (सरचार्ज) की हिस्सेदारी वर्ष 2011-12 के 10.4% से बढ़कर 13.6% हो गई है। चूंकि ये केंद्र के विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं होते, इसलिए बिहार जैसे राज्यों को उनके संवैधानिक हिस्से का नुकसान हो रहा है।

बाढ़-सुखाड़ से बचाव के लिए विशेष पैकेज

उन्होंने उत्तरी बिहार में कोसी, गंडक, बागमती जैसी नदियों से होने वाली तबाही को रोकने के लिए रिलीफ एवं डिजास्टर रिजिलिएंट पैकेज का अनुरोध किया। इसमें सैटेलाइट पूर्वानुमान, जीआइएस मैपिंग, रियल टाइम मानीटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया गया है। साथ ही बाढ़ और सूखे के स्थायी समाधान के लिए नदी जोड़ो परियोजना को प्राथमिकता देने की अपील की गई।

कृषि में आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास

प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए कृषि क्षेत्र में एआई, ड्रोन और ब्लाकचेन जैसी नई तकनीकों पर आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की जरूरत जताई गई। प्रचुर जल संसाधन और कुशल श्रम की उपलब्धता को देखते हुए प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष सहयोग की मांग की गई।

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