CJI Surya Kant Interacts With Students In Patna: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को पटना की चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में छात्रों के साथ खुलकर संवाद किया। इस दरमियान छात्रों ने उनसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, कॉलेजियम में असहमति, लॉ की पढ़ाई, फीस वृद्धि और युवा वकीलों से जुड़े कई सवाल पूछे। CJI ने भी छात्रों के सवालों का सीधे और बेबाक अंदाज में जवाब दिया।
इस कार्यक्रम में एक छात्र ने अपने हक के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल किया। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका छात्रों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है और अगर किसी प्रदर्शन के दरमियान पुलिस की तरफ से बल का प्रयोग किया जाता है तो अदालतें उस पर गौर करेंगी।
संवाद के दौरान छात्रों ने कॉलेजियम से जजों की नियुक्ति के दौरान होने वाली असहमति को सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल किया। इस पर CJI ने बताया कि किसी उम्मीदवार के नकारात्मक टिप्पणियों को सार्वजनिक करने से उसकी प्रतिष्ठा और गरिमा प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक करने में सावधानी बरती जाती है।
छात्रों ने वकालत के पढ़ाई की बढ़ती फीस और सीमित स्कॉलरशिप का मुद्दा भी CJI के सामने रखा। इसके अलावा वकीलों को शुरुआती दौर में होने वाली आर्थिक और वकालत के परेशानियों पर भी छात्रों ने सवाल पूछे। CJI ने युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में सहायता के लिए उपयोगी टिप्स दिया।
कार्यक्रम के दौरान CNLU के वीसी प्रो. फैजान मुस्तफा ने 5 साल के लॉ कोर्स के ढांचे में बदलाव का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चार साल की अकादमिक पढ़ाई के बाद अंतिम वर्ष में छात्रों के लिए अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ अदालत की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का मौका मिलेगा। CJI ने इस सुझाव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
इस पूरे संवाद की खास बात यह रही कि छात्रों को CJI से सीधे सवाल पूछने का मौका मिला। CJI सूर्यकांत ने भी कहा कि उन्हें खुले और सीधे सवाल-जवाब पसंद हैं। कार्यक्रम में न्यायपालिका, कानूनी शिक्षा और युवा वकीलों के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।