बिहार में 'चाणक्य' बने नेता को मोदी-शाह देंगे ईनाम, चुनाव खत्म होते ही होगा नए BJP अध्यक्ष का एलान! 
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बिहार में 'चाणक्य' बने नेता को मोदी-शाह देंगे ईनाम, चुनाव खत्म होते ही होगा नए BJP अध्यक्ष का एलान!

Bihar Results: बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की शानदार जीत के पीछे बीजेपी की आक्रामक रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी-नीतीश की जोड़ी का असर रहा। इसका श्रेय धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावडे को दिया जा रहा है।

अर्पित शुक्ला

BJP New President: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया है। रुझानों में एनडीए आसानी से बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करता हुआ नजर आ रहा है, जबकि महागठबंधन बहुमत के आंकड़ों से काफी दूर दिखाई दे रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस जैसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी भी महज 5 सीटों पर आगे चल रही है। हालांकि, एनडीए की इस बड़ी जीत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजनाओं के साथ-साथ बीजेपी की धुआंधार रणनीति भी अहम भूमिका में रही है।

बीजेपी की आक्रामक प्रचार रणनीति

बीजेपी ने इस बार महागठबंधन के खिलाफ आक्रामक प्रचार किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को जंगलराज के मुद्दे पर घेरने की रणनीति अपनाई। मोदी के इस आरोप ने बिहार की जनता को एक बार फिर लालू प्रसाद यादव के जंगलराज की याद दिला दी। मोदी-नीतीश की जोड़ी को जनता ने खूब सराहा, जिसका परिणाम एनडीए को भारी जनसमर्थन के रूप में सामने आया।

बीजेपी के रणनीतिकारों की भूमिका

एनडीए की इस जीत में बीजेपी के रणनीतिकारों धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े का नाम विशेष रूप से चर्चा में है। धर्मेंद्र प्रधान को सितंबर में बिहार के चुनावी प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका बिहार से पुराना नाता है। 2012 में वह राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे और तब से ही बिहार में बीजेपी की संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने में जुटे थे। धर्मेंद्र प्रधान के नीतीश कुमार के साथ व्यक्तिगत संबंध भी काफी अच्छे रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ओबीसी समुदाय से आते हैं, जो नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक रहा है। उन्होंने बिहार में बीजेपी के रुख को समझते हुए सीटों पर फेरबदल किया और रणनीतिक रूप से चुनावी प्रचार को मजबूत किया। उन्हें बिहार में बीजेपी का चाणक्य कहा जा सकता है, जिन्होंने चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाई है।

विनोद तावड़े को मिलेगा ईनाम

वहीं, विनोद तावड़े, जो बिहार में बीजेपी के चुनावी प्रभारी रहे, उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार में एनडीए को बढ़त दिलाने में विनोद तावड़े का दिमाग रहा है। उन्होंने एक-एक सीट पर प्रत्याशियों के चयन को बहुत सोच-समझकर किया, और मैथिली ठाकुर जैसे नामों को चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय भी उनका ही था।

अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी विनोद तावड़े को उनकी इस रणनीतिक सफलता के बाद पार्टी में बड़ा पद दे सकती है। शपथग्रहण के बाद उन्हें अध्यक्ष पद का इनाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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