गोह विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो) 
बिहार

गोह विधानसभा सीट: बदलता जनादेश, वामदल से भाजपा तक सियासी सफर, भीम सिंह बनाम मनोज शर्मा

Bihar Election: बिहार की चुनावी बिसात पर कुछ सीटें ऐसी होती हैं, जो अपने इतिहास से ज्यादा अपने वर्तमान के बड़े उलटफेर के लिए पहचानी जाती हैं। औरंगाबाद जिले की गोह विधानसभा सीट भी उन्हीं में से एक है।

प्रतीक पाण्डेय

Bihar Assembly Election 2025:  बिहार के औरंगाबाद जिले की गोह विधानसभा सीट दशकों तक कांग्रेस, वाम दलों और फिर जनता दल यूनाइटेड का गढ़ रही। 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां ऐसा बड़ा बदलाव हुआ कि गोह का नाम बिहार की राजनीतिक सुर्खियों में आ गया। पिछले चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीम सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज मनोज कुमार शर्मा को भारी अंतर से हराया। यह जीत गोह के चुनावी इतिहास में राजद का पहला परचम था।

गोह विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी और यह काराकाट लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 16 विधानसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि यह सीट कभी किसी एक पार्टी के प्रभुत्व में नहीं रही, बल्कि यहाँ बदलते जनादेश की परंपरा रही है:

शुरुआती प्रभुत्व: शुरुआती दौर में कांग्रेस (4 बार) और सीपीआई (4 बार) ने सबसे अधिक जीत दर्ज की।

समाजवादी प्रभाव: बाद में सोशलिस्ट और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को भी एक-एक बार सफलता मिली।

जदयू का उदय: साल 2000 में समता पार्टी (जो बाद में जदयू बनी) ने जीत दर्ज की और फिर लगातार 3 बार यह सीट जीती, जिसने यहाँ एक नया राजनीतिक ध्रुव बनाया।

भाजपा का प्रवेश: 2015 में यह सीट पहली बार भाजपा के खाते में गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यहाँ मतदाता हर बार नए विकल्पों की तलाश में रहते हैं।

2020 का बड़ा उलटफेर और 2025 की टक्कर

2020 का चुनाव एक नया अध्याय लेकर आया, जब राजद ने इस सीट पर पहली बार कब्जा जमाया। राजद उम्मीदवार भीम कुमार सिंह ने भाजपा प्रत्याशी मनोज कुमार शर्मा को शिकस्त दी थी, जिससे यह सीट महागठबंधन के लिए एक बड़ी जीत साबित हुई।

आगामी Bihar Assembly Election 2025 में एक बार फिर ये दोनों प्रमुख उम्मीदवार आमने सामने हैं:

राजद: भीम कुमार सिंह (सीट बचाने की चुनौती)

भाजपा: मनोज कुमार शर्मा (हार का बदला लेने की तलाश)

यह मुकाबला राजद के लिए पहली जीत को बरकरार रखने और भाजपा के लिए अपनी खोई हुई सीट को वापस हासिल करने की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

जातीय समीकरण और मतदाता संरचना

गोह विधानसभा एक सामान्य सीट है, जहां यादव, मुस्लिम, राजपूत, भूमिहार और पासवान मतदाताओं की आबादी अच्छी-खासी है। यह जटिल जातीय मिश्रण ही इस सीट के अप्रत्याशित चुनावी मिजाज का मुख्य कारण है।  हालांकि यह सामान्य सीट है, फिर भी अनुसूचित जातियों की भागीदारी करीब 20.72 प्रतिशत है। मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत भी लगभग 8.4 प्रतिशत है, जो चुनावी समीकरणों में खास भूमिका निभाता है। 2020 के चुनाव में यहाँ 3,08,689 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 59.92 प्रतिशत ने मतदान किया था, जो मतदाताओं की सक्रियता को दर्शाता है।

इतिहास, अर्थव्यवस्था और विकास के मुद्दे

गोह की भूमि भले ही किसी महान स्वतंत्रता संग्राम के नायक के लिए सीधे तौर पर न जानी जाती हो, लेकिन इतिहास की आहटें यहाँ की मिट्टी में दबी हैं। दाउदनगर अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले इस प्रखंड ने मौर्य और गुप्त जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है। दिलचस्प बात यह है कि 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में यहाँ के जमींदारों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का ही साथ दिया था, जिसका एक परिणाम यह हुआ कि यह इलाका औद्योगिकीकरण की दौड़ से काफी हद तक दूर रहा।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर टिका है गोह

आज भी यह इलाका मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर टिका है। यहां धान, गेहूं और दलहन प्रमुख फसलें हैं। खेती-बाड़ी के अलावा, बांस से बनी हस्तकला और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने का काम भी यहाँ रोजगार का एक अहम जरिया है। विकास, बेरोजगारी और सिंचाई यहाँ के प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं।

गोह विधानसभा सीट Bihar Politics में एक ऐसी निर्णायक सीट है, जहां राजद की पहली जीत पर अब भाजपा की चुनौती भारी है। भीम कुमार सिंह और मनोज कुमार शर्मा के बीच का यह मुकाबला न केवल व्यक्तिगत वर्चस्व का है, बल्कि यह बिहार चुनाव 2025 में राजद के बढ़ते जनाधार और भाजपा की संगठनात्मक ताकत की भी परीक्षा लेगा। इस जटिल जातीय और राजनीतिक बिसात पर, जीत उसी दल की होगी जो स्थानीय विकास और जातीय समीकरणों को बेहतर ढंग से साध पाएगा।

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