CAQM ने दिल्ली की गाड़ियों के लिए नया नियम लाया है। Source. Pixabay
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दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर बड़ा वार, अब इन कमर्शियल गाड़ियों के नए रजिस्ट्रेशन पर लगेगी रोक

CAQM New Rules: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए CAQM ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने N1 श्रेणी के LGVs के नए रजिस्ट्रेशन पर चरणबद्ध रोक लगाने का फैसला किया है।

सिमरन सिंह

Delhi-NCR Pollution: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि आयोग ने पेट्रोल, डीजल और CNG से चलने वाले हल्के मालवाहक वाहनों यानी N1 श्रेणी के LGVs के नए रजिस्ट्रेशन पर चरणबद्ध रोक लगाने का फैसला किया है। जिसको 18 अगस्त को हुई CAQM की 29वीं पूर्ण बैठक में Direction No. 102 को मंजूरी दी गई। वहीं आयोग का कहना है कि LGVs सक्रिय वाहन बेड़े का सिर्फ करीब 1.2% हिस्सा हैं लेकिन पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन में इनका योगदान लगभग 3.3% है। ऐसे में इन वाहनों पर नियंत्रण को प्रदूषण कम करने की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

1 जनवरी 2027 से दिल्ली में लागू होगा नियम

CAQM के नए निर्देश के अनुसार 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए पेट्रोल, डीजल और CNG N1 LGVs के रजिस्ट्रेशन पर रोक लागू होगी। इसके बाद हाई व्हीकल डेंसिटी वाले NCR जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में 1 जुलाई 2027 से यही व्यवस्था लागू होगी। वहीं NCR के बाकी जिलों में नए पेट्रोल और डीजल N1 LGVs पर प्रतिबंध 1 जनवरी 2028 से लागू किया जाएगा। वहीं N2 श्रेणी के LGVs के लिए भी 2028 और 2029 में चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने की योजना है।

स्टोन क्रशर पर भी बढ़ेगी निगरानी

CAQM ने स्टोन क्रशिंग यूनिटों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Direction No. 103 को भी मंजूरी दी है। अब CPCB की पर्यावरणीय गाइडलाइंस के धूल नियंत्रण उपायों को इन इकाइयों की Consent to Operate की शर्तों में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही निगरानी के लिए वीडियो सर्विलांस, PM2.5 और PM10 सेंसर तथा व्हील-वॉशिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा। बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। संचालकों को सुधारात्मक कार्रवाई का प्रमाण और नोटरीकृत हलफनामा देना होगा।

1,816 इकाइयों पर क्लोजर ऑर्डर

CAQM ने जानकारी दी है कि 10 अगस्त 2026 तक नियमों का उल्लंघन करने वाली 1,816 प्रदूषणकारी इकाइयों को Closure Orders जारी किए गए। अनुपालन के बाद 1,461 मामलों में दोबारा संचालन पर विचार किया गया, जबकि 126 मामले आगे की कार्रवाई के लिए SPCB/DPCC को भेजे गए। वहीं आयोग ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े चार R&D प्रोजेक्ट के लिए दो वर्षों में 3.25 रुपए करोड़ से ज्यादा की वित्तीय सहायता भी मंजूर की है। इनमें सड़क की धूल, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, ऊंची इमारतों में PM और पराली जलाने की भविष्यवाणी जैसे विषय शामिल हैं।

4.60 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

दिल्ली-NCR में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए 2026-27 में 4.60 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। 4 अगस्त तक 2.53 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके थे। इसके अलावा बायोमास को-फायरिंग लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले छह थर्मल पावर प्लांट पर करीब ₹61.85 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई है। इन फैसलों से साफ है कि CAQM अब वाहनों के साथ-साथ औद्योगिक प्रदूषण, धूल और हरित क्षेत्र सभी मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई तेज कर रहा है।

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