Hydrogen Fuel: देश में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार लगातार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दे रही है। जहां E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अब देशभर में उपलब्ध है वहीं अब हाइड्रोजन फ्यूल को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। इसी दिशा में भारत को बड़ी सफलता मिली है। बता दें कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी मिल गई है जो जल्द ही हरियाणा में अपनी सेवाएं शुरू करेगी। माना जा रहा है कि यह परियोजना भारतीय रेलवे के हरित परिवहन मिशन की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।
जानकारी में बताया जा रहा है कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। यह 10 कोच वाली ट्रेन रोजाना दो राउंड ट्रिप लगाएगी और प्रतिदिन कुल 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें स्टोर की गई हाइड्रोजन और हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली बनाई जाती है। जिससे ट्रेन की मोटर चलती है। इस प्रक्रिया में धुएं या जहरीली गैस के बजाय केवल पानी की भाप निकलती है इसलिए इसे पर्यावरण के लिहाज से बेहद स्वच्छ तकनीक माना जाता है।
विशेषज्ञों का इसको लेकर कहना है कि ऊर्जा क्षमता के मामले में हाइड्रोजन पारंपरिक ईंधनों से काफी आगे माना जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक 1 किलोग्राम हाइड्रोजन से लगभग उतनी ऊर्जा मिल सकती है। जितनी करीब 4.5 किलोग्राम डीजल या 3 से 4 किलोग्राम CNG से प्राप्त होती है। यही वजह है कि हाइड्रोजन से चलने वाले वाहन बेहतर पिकअप, अधिक शक्ति और लंबी दूरी तय करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन वास्तविक प्रदर्शन वाहन की तकनीक और दक्षता पर भी निर्भर करता है।
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फिलहाल हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण और परिवहन अपेक्षाकृत महंगा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन और पर्याप्त रिफ्यूलिंग स्टेशन बनने के बाद इसकी लागत में काफी कमी आ सकती है। क्योंकि हाइड्रोजन का उत्पादन पानी से भी किया जा सकता है इसलिए भविष्य में आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
यदि हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होता है, तो आने वाले वर्षों में यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है बल्कि लंबी अवधि में उपभोक्ताओं के लिए भी किफायती ईंधन साबित हो सकता है।