IntelliSeat में क्या खासियत है। Source. Navbharat Desk
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ड्राइवर को झपकी आते ही कांपेगी सीट, IIT Madras ने बनाया ऐसा Smart Seat सिस्टम, हादसे से पहले मिलेगा अलर्ट

IntelliSeat Technology: भारत में सड़क हादसों के पीछे कई बार वाहन की तकनीकी खराबी नहीं बल्कि ड्राइवर की थकान और नींद बड़ी वजह बन जाती है।

सिमरन सिंह

Road Safety Technology: भारत में सड़क हादसों के पीछे कई बार वाहन की तकनीकी खराबी नहीं बल्कि ड्राइवर की थकान और नींद बड़ी वजह बन जाती है। इसमें खासकर लंबे हाईवे सफर के दौरान कुछ सेकंड की झपकी भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसी चुनौती को देखते हुए IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी स्मार्ट सीट तैयार की है जो ड्राइवर के सोने से पहले ही थकान के संकेत पहचानने में मदद करती है। बता दें कि Rehabilitation Bioengineering ग्रुप ने सीटिंग कंपनी हरिता के साथ मिलकर इस तकनीक को विकसित किया है। इसका नाम IntelliSeat रखा गया है। देखने में यह सामान्य कार सीट जैसी लगती है लेकिन इसके अंदर लगे सेंसर ड्राइवर की बॉडी मूवमेंट और थकान से जुड़े संकेतों को समझते हैं।

बिना कैमरा और तार के पहचानती है थकान

देखा गया है कि आज बाजार में कई ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम कैमरे, पहनने योग्य डिवाइस या शरीर से जुड़े इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन IntelliSeat की खासियत यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए ड्राइवर को शरीर पर कोई डिवाइस पहनने की जरूरत नहीं होती। यह सीट के बैकरेस्ट और बेस में मौजूद सेंसर ड्राइवर के बैठने के तरीके, शरीर की स्थिति और थकान के दौरान होने वाली हल्की गतिविधियों को महसूस करते हैं। इस तरह सिस्टम ड्राइविंग के दौरान थकान के संकेतों पर नजर रखता है बिना ड्राइवर के लिए किसी अतिरिक्त उपकरण को बोझ बनाए।

मांसपेशियों के सिग्नल से समझेगी थकान

इस तकनीक में Surface Electromyography (sEMG) जैसे संकेतों का इस्तेमाल मांसपेशियों की थकान को समझने के लिए किया जाता है। इसमें खास तौर पर पीठ और कंधों की मांसपेशियों से जुड़े हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल सिस्टम को थकान के संकेत पहचानने में मदद करते हैं। जिसका सीधी मतलब है कि सीट सिर्फ यह नहीं देखती कि ड्राइवर की आंखें बंद हुईं या नहीं बल्कि शरीर में थकान से जुड़े बदलावों को भी समझने की कोशिश करती है।

तीन स्तरों पर मिलेगा अलर्ट

IntelliSeat ड्राइवर की थकान को अलग-अलग स्तरों पर पहचानकर चेतावनी दे सकती है।

  • हल्की थकान: डैशबोर्ड पर लाइट जलाकर ड्राइवर को सावधान किया जाता है।

  • थकान बढ़ने पर: लाइट के साथ बीप अलर्ट मिलता है।

  • ज्यादा थकान: सीट वाइब्रेट करने लगती है और वाहन मालिक के मोबाइल ऐप पर नोटिफिकेशन भेजा जाता है।

पुरानी कार, बस और ट्रक में भी लग सकती है

इसको लेकर IntelliSeat को सिर्फ नई गाड़ियों के लिए नहीं बनाया गया है। इसे मौजूदा कार, बस और ट्रक में भी फिट किया जा सकता है और इसके लिए बड़े तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं बताई गई है। IoT आधारित यह सिस्टम ड्राइवर की स्थिति से जुड़ा डेटा मोबाइल ऐप तक भेज सकता है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो खासकर लंबी दूरी के ट्रक और बस ड्राइवरों में थकान से जुड़े हादसों को कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी भी ड्राइवर-असिस्ट तकनीक की तरह इसे सुरक्षित ड्राइविंग और पर्याप्त आराम का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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