TVS's Venu Srinivasan On Electric Vehicle Policy: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य की मोबिलिटी का अहम हिस्सा बताया जा रहा है लेकिन TVS Motor के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने इस दिशा में एक अलग नजरिया सामने रखा है। बता दें कि 5 अक्टूबर को हुए IFQM Symposium 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही एकमात्र रास्ता नहीं हैं। उनके मुताबिक ऑटो इंडस्ट्री को किसी एक पावरट्रेन पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तकनीकों को उनके वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर देखना चाहिए।
वेणु श्रीनिवासन ने EVs के खिलाफ रुख नहीं अपनाया बल्कि कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देना चाहिए। साथ ही ग्राहक की जरूरत और पसंद के आधार पर EV को अपनाने की रफ्तार तय होनी चाहिए न कि लोगों को सीमित विकल्पों तक उसे बांध दिया जाए।
उन्होंने कहा, "मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हमें (टेक्नोलॉजी के मामले में) किसी एक तकनीक से बंधे नहीं रहना चाहिए और प्रदूषण, क्वालिटी और पर्यावरण के लिहाज़ से देश पर पड़ने वाले कुल असर को देखना चाहिए। इसलिए EV ही एकमात्र समाधान नहीं है।"
वहीं यह नजरिया इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी खासकर दोपहिया और तीन-पहिया वाहनों में तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में बहस सिर्फ EV बनाम पेट्रोल तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग इस्तेमाल के लिए सही तकनीक चुनने पर केंद्रित होती है।
श्रीनिवासन ने पेट्रोल में ethanol blending को भी भारत के लिए उपयोगी बताया है। उनका तर्क है कि इससे देश की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। जिसको लेकर उन्होंने कहा, "परफॉर्मेंस में गिरावट बहुत मामूली है। मुझे नहीं लगता कि इससे हमें पीछे हटना चाहिए।
आखिर, पूरा ब्राज़ील इथेनॉल पर ही तो चलता है।" यहां कंपनी के प्रतिनिधि की राय और सरकारी नीति को अलग-अलग समझना जरूरी है। जिसमें सरकार के अनुसार भारत में नवंबर 2025 से जून 2026 तक औसत ethanol blending 20% रही है। वहीं सरकार ने यह भी कहा है कि E20 को वैज्ञानिक परीक्षण और ऑटो इंडस्ट्री समेत विभिन्न हितधारकों के साथ सलाह-मशवरे के बाद लागू किया गया।
श्रीनिवासन की बात का मुख्य फोकस किसी एक तकनीक को खारिज करना नहीं बल्कि technology-agnostic approach अपनाने पर है। इसका मतलब है कि EV, ethanol और दूसरी पावरट्रेन तकनीकों का मूल्यांकन प्रदूषण, पर्यावरणीय प्रभाव, दक्षता, लागत और उपभोक्ता जरूरत जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाए। वहीं आखिर भारत जैसे बड़े और अलग-अलग जरूरतों वाले बाजार में हर वाहन के लिए एक ही समाधान काम करेगा यह जरूरी नहीं है। इसलिए आने वाले समय में EV के साथ वैकल्पिक ईंधन और दूसरी कम-उत्सर्जन तकनीकों पर भी चर्चा जारी रह सकती है। लेकिन किस तकनीक को ग्राहक कितनी तेजी से अपनाते हैं इसमें कीमत, उपलब्धता, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता पसंद अहम भूमिका निभाएंगे।