EV Battery: EV बैटरी को लेकर इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों के मन में एक सवाल लगातार आता रहता है कि जब बैटरी पुरानी हो जाएगी और उसकी क्षमता कम हो जाएगी तब उसका क्या होगा? वैसे यह तो जरूरी नहीं कि कार से निकलने के बाद हर बैटरी सीधे कचरे में चली जाए। उसकी बची हुई क्षमता के आधार पर उसे दोबारा इस्तेमाल, दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल या आखिर में रिसाइकिल किया जा सकता है। IEA ने इसको लेकर बताया है कि बैटरी की री-यूज और रिसाइक्लिंग आने वाले समय में बैटरी सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
EV Battery समय के साथ अपनी क्षमता खोती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैटरी अचानक पूरी तरह बेकार हो जाती है। अगर वह कार को पहले जैसी रेंज देने की स्थिति में नहीं है तो उसकी बची क्षमता को दूसरे उपयोग में लगाया जा सकता है।
इसका सीधा मतलब है कि ऐसी बैटरी को स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी इसे किसी जगह पर बिजली स्टोर करने के लिए लगाया जा सकता है। सोलर पैनल से बनी बिजली को स्टोर करने या बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करना भी इसका एक संभावित उपयोग है। लेकिन ऐसी बैटरी को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले उसकी स्थिति, सुरक्षा और बची हुई क्षमता की जांच जरूरी होती है। IEA भी सेकेंड-लाइफ बैटरियों में सुरक्षा, लागत और बची हुई लाइफ जैसी चुनौतियों को महत्वपूर्ण मानता है।
हर पुरानी EV Battery का रास्ता एक जैसा नहीं होता। कुछ बैटरियों को रीफर्बिश करके दोबारा वाहन में इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि कुछ को कार से अलग किसी दूसरे काम के लिए रीपर्पज किया जा सकता है। जब बैटरी वास्तव में अपने उपयोगी जीवन के अंत तक पहुंचती है तब रिसाइक्लिंग की भूमिका शुरू होती है। लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण पदार्थों को बैटरी से रिकवर किया जा सकता है। इससे नए कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। IEA का इसको लेकर बताना है कि ने वाले वर्षों में एंड-ऑफ-लाइफ EV बैटरियां रिसाइक्लिंग के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगी।
भारत में पुरानी बैटरियों को लेकर Battery Waste Management Rules, 2022 लागू हैं। इन नियमों में इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियां भी शामिल हैं और उत्पादकों पर बैटरी कलेक्शन, रिसाइक्लिंग या रिफर्बिशमेंट से जुड़ी Extended Producer Responsibility (EPR) तय की गई है। नियमों के तहत इस्तेमाल की गई बैटरियों को लैंडफिल या खुले तौर पर जलाने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मैनेज करना होता है। सरकार ने 2024 और 2025 में इन नियमों में संशोधन भी किए हैं। इसके अलावा, भारत में लिथियम-आयन बैटरी जैसे स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी के लिए रिसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आने वाले समय में कोई ग्राहक सिर्फ बैटरी खराब होने की वजह से नहीं बल्कि ज्यादा रेंज, बेहतर चार्जिंग या नए फीचर्स के कारण भी अपनी पुरानी EV बदल सकता है। ऐसे में पूरी कार की बाजार कीमत कम हो सकती है लेकिन उसकी बैटरी में मौजूद उपयोगी क्षमता और सामग्री का आर्थिक मूल्य बना रह सकता है।
इसलिए EV की बैटरी को सिर्फ एक महंगे पार्ट के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। उसका दूसरा जीवन और अंत में रिसाइक्लिंग भी महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे पुरानी EV बैटरियों की संख्या बढ़ेगी, सुरक्षित कलेक्शन, री-यूज और रिसाइक्लिंग का पूरा सिस्टम इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य के लिए उतना ही जरूरी होगा। IEA के मुताबिक एंड-ऑफ-लाइफ बैटरियों की उपलब्धता 2030 के बाद और खासकर 2030 के मध्य के बाद तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।