यमन के नव नियुक्त प्रधानमंत्री शाई अल-जंदानी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Yemen News In Hindi: यमन में एक दशक से जारी गृह युद्ध और आंतरिक संघर्षों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यमन की सत्तारूढ़ नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशद अल-अलीमी ने देश में नई कैबिनेट का गठन किया है। यह निर्णय दक्षिणी यमन में हुए घातक संघर्षों और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित एक प्रमुख अलगाववादी समूह के विघटन के कुछ हफ्तों बाद लिया गया है।
महिलाओं की कम भागीदारी शुक्रवार देर रात जारी एक राष्ट्रपति डिक्री के अनुसार, 35 सदस्यीय इस नई कैबिनेट की कमान प्रधानमंत्री शाई अल-जंदानी को सौंपी गई है जो विदेश मंत्री की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। इस पूरी कैबिनेट में केवल दो महिलाओं को स्थान मिला है जिनमें अफराह अल-जुबा (योजना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री) और अहद जासूस (महिला मामलों की राज्य मंत्री) बनी है।
यमन के सैन्य और सुरक्षा ढांचे में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। मेजर जनरल ताहेर अल-अकीली को रक्षा मंत्री और मेजर जनरल इब्राहिम हैदान को गृह मंत्रालय का नेतृत्व सौंपा गया है। ये दोनों मंत्री सऊदी अरब समर्थित उन प्रयासों की निगरानी करेंगे जिनका उद्देश्य अलगाववादी ‘दक्षिणी राष्ट्रपति परिषद’ के मिलिशिया को समाप्त करना है।
हाल के घटनाक्रमों ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर की गहरी दरारों को उजागर कर दिया है। सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव तब खुलकर सामने आया जब यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) ने दिसंबर में तेल समृद्ध क्षेत्रों और अदन के राष्ट्रपति महल पर कब्जा कर लिया था।
हालांकि, सऊदी समर्थित बलों ने इन क्षेत्रों पर फिर से नियंत्रण पा लिया जिसके बाद STC ने खुद को भंग करने की घोषणा की। सऊदी अरब ने यूएई पर अलगाववादियों का समर्थन करने और उनके नेता को देश से बाहर निकालने में मदद करने का आरोप लगाया है।
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यमन वर्तमान में एक जटिल स्थिति में है जहां उत्तर के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों और राजधानी सना पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का कब्जा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार दक्षिण से काम कर रही है। यमन का यह युद्ध एक गतिरोध पर बना हुआ है जहां हाल ही में विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच एक समझौता हुआ था जिसने प्रत्यक्ष हमलों को कम किया है। नई कैबिनेट के सामने अब देश की अर्थव्यवस्था को संभालने और आंतरिक विद्रोह को शांत करने की बड़ी चुनौती होगी।