यमन के पूर्व प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक और नए प्रधानमंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी
Yemen PM Salem Bin Brik resigns: यमन में एक बार फिर बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जहां प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। सऊदी अरब समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने गुरुवार को इस इस्तीफे को स्वीकार करते हुए नए नेतृत्व की घोषणा कर दी है। देश में बढ़ते सुरक्षा संकट और खाड़ी देशों के बीच आपसी खींचतान के कारण उपजे दबाव को इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह माना जा रहा है। अब विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है, जिन्हें जल्द ही नए मंत्रिमंडल के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यमन के प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपना इस्तीफा प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सौंपा। राज्य समाचार एजेंसी सबा के अनुसार, परिषद ने इस इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। इस कदम से यमन के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है।
सलेम के जाने के बाद विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को यमन के नए प्रधानमंत्री के रूप में नामित किया गया है। जिंदानी अब एक नया मंत्रिमंडल बनाने के लिए काम शुरू करेंगे जो देश की जर्जर आर्थिक स्थिति को संभालने का प्रयास करेगा। उनकी नियुक्ति को चुनौतीपूर्ण समय में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
इस राजनीतिक बदलाव के पीछे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ते मतभेदों को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच भू-राजनीति और तेल उत्पादन जैसे मुद्दों पर पिछले कई महीनों से तीखी असहमति बनी हुई है। यमन की जमीन पर दोनों शक्तियों के हितों का टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है।
दिसंबर में यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) ने यमन के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अपना कब्जा जमा लिया था। ये लड़ाके सऊदी अरब की सीमा के काफी करीब तक पहुंच गए थे, जिसे सऊदी ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना। हालांकि, बाद में सऊदी समर्थित लड़ाकों ने इन क्षेत्रों को काफी हद तक मुक्त करा लिया था।
सऊदी अरब और यूएई ने पूर्व में ईरान समर्थित हौथियों के खिलाफ एक सैन्य गठबंधन बनाकर साथ काम किया था। इस लंबे गृहयुद्ध ने यमन में दुनिया के सबसे खतरनाक मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है। लेकिन अब साझा दुश्मन के बजाय गठबंधन के सहयोगियों के बीच वर्चस्व की जंग ने यमन की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।
यह भी पढ़ें: साउथ चाइना सी में खत्म होगी चीन की दादागिरी…जापान ने फिलिपींस से मिलाया हाथ, अब क्या करेगा ड्रैगन?
नए प्रधानमंत्री जिंदानी के सामने हौथी विद्रोहियों से निपटने के साथ-साथ अपने ही गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने की कड़ी चुनौती होगी। यमन की जनता बुनियादी सुविधाओं और शांति की तलाश में है, लेकिन क्षेत्रीय शक्तियों के हस्तक्षेप ने इस राह को और कठिन बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब जिंदानी द्वारा गठित किए जाने वाले नए मंत्रिमंडल पर टिकी हुई हैं।