
पाकिस्तान ईसाई समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न में खतरनाक देशों में 8वें स्थान पर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Systematic Persecution of Pakistani Christians: वैश्विक संगठन ओपन डोर्स की वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2026 में पाकिस्तान की भयावह स्थिति का खुलासा हुआ है। यूरोपियन पार्लियामेंट में पेश की गई इस नई रिपोर्ट में पाकिस्तानी ईसाइयों पर हो रहे सिस्टमैटिक अत्याचारों की पूरी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ईसाइयों के लिए दुनिया का आठवां सबसे खतरनाक देश बना हुआ है। जहां अल्पसंख्यक समुदाय आज भी भेदभाव, हिंसा और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का शिकार हो रहा है।
ओपन डोर्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि पाकिस्तान में ईसाई समुदाय को व्यवस्थित भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसमें हिंसा, बंधुआ मजदूरी, जबरन धर्मांतरण और लैंगिक उत्पीड़न जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं जो लगातार बढ़ रही हैं। राज्य की ओर से इस समुदाय को मिलने वाला संरक्षण बेहद कम और नाकाफी साबित हो रहा है।
ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संसद में 27 जनवरी 2026 को इस रिपोर्ट पर चर्चा के लिए एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम की मेजबानी धार्मिक स्वतंत्रता इंटरग्रुप की अध्यक्ष मिरियम लेक्समैन और बर्ट-जान रुइसेन जैसे प्रमुख यूरोपीय सांसदों ने की थी। वहां पाकिस्तान के अधिकार कार्यकर्ता जोसेफ जान्सन ने अल्पसंख्यकों की बढ़ती असुरक्षा पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की।
पाकिस्तान की संसद ने मई 2025 में विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय करने वाला नया कानून पारित किया था। इसके बावजूद अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और अपहरणकर्ताओं से शादी कराने की घटनाएं अभी भी नहीं रुकी हैं। अदालतों पर आरोप है कि वे नागरिक कानून के बजाय अक्सर शरिया कानून के आधार पर फैसले सुनाती हैं।
पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए एक हथियार की तरह लगातार किया जा रहा है। इन कानूनों के कारण भीड़ की हिंसा और चर्चों पर हमलों की कई दुखद घटनाएं सामने आती रहती हैं। जोसेफ जान्सन ने बताया कि झूठे आरोपों के चलते कई निर्दोष लोगों को बिना न्याय के जेलों में रहना पड़ता है।
वर्ष 2023 में जरनवाला में हुए भयानक हमलों का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां कम से कम 26 चर्च जला दिए गए थे। हालांकि इस घटना को लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी भी दोषी को सजा नहीं मिल सकी है। यह स्थिति पाकिस्तान में अपराधियों के बीच बने दंडमुक्ति के खतरनाक माहौल को साफ तौर पर दर्शाती है।
रिपोर्ट में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) जैसे कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों और उनके प्रभाव पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। सरकार द्वारा इन संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न किए जाने से अल्पसंख्यकों के लिए स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ती जा रही है। धार्मिक कैदी अभी भी जेलों में बंद हैं और पीड़ितों को न्याय का इंतजार बना हुआ है।
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ईसाइयों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक 50 देशों की सूची में पाकिस्तान का शीर्ष 10 में रहना चिंताजनक है। व्यवस्थित भेदभाव और सरकारी निष्क्रियता के कारण अल्पसंख्यक समुदाय के मानवाधिकारों का हर स्तर पर दमन किया जा रहा है। वैश्विक समुदाय अब पाकिस्तान सरकार से इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और सुरक्षा की मांग कर रहा है।






