Women’s Day Special: विदेश में अपना परचम लहराने वाली भारतीय मूल की महिलाएं, जिन्होंने लोगों के दिलों में बनाई खास जगह
महिलाएं आजकल पुरुषों से किसी भी कार्य में पीछे नहीं हैं। वह अपनी अलग पहचान रखती हैं और उनके कंधे से कंधा मिलाकर चलना भी जानती हैं। प्राचीन समय हो या आज का युग महिलाओं को जिसने भी कम आंका है वह मुंह के बल गिरा है।
- Written By: प्रीति शर्मा
विदेश में अपना परचम लहराने वाली भारतीय मूल की महिलाएं, जिन्होंने लोगों के दिलों में बनाई खास जगह
International Womens Day: महिलाएं आजकल पुरुषों से किसी भी कार्य में पीछे नहीं हैं। वह अपनी अलग पहचान रखती हैं और उनके कंधे से कंधा मिलाकर चलना भी जानती हैं। प्राचीन समय हो या आज का युग महिलाओं को जिसने भी कम आंका है वह मुंह के बल गिरा है। रानी लक्ष्मी बाई हो या मैरी कॉम हर युग में महिलाओं ने अपने काम से अलग पहचान बनाई है। भारत में नारी को शक्ति के रूप में पूजा जाता है। वहीं भारतीय मूल की महिलाएं पूरी दुनिया में बसी हुई हैं। कई महिलाओं ने विदेशी मुल्कों में अपनी छाप छोड़ी है कि जिसे पूरी दुनिया पहचानती है। सियासत से लेकर चांद तक पहुंचने में भारतीय महिलाएं पीछे नहीं हैं। वर्तमान में अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, नॉर्वे आदि देशों में महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। आज हम आपको भारतीय मूल की कुछ ऐसी महिलाओं से मिलाने जा रहे हैं जो विदेशों में अपना झंडा गाड़ चुकी हैं।
कल्पना चावला
हर भारतीय महिला अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत इस नाम से लेकर आती है। कल्पना चावला एक ऐसा नाम है जिसने हर महिलाओं के दिल में ऊंची उड़ान भरने की चाह जगाई है। उनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है जिसने विदेशों में भारतीय महिलाओं का नाम किया है। वह एक भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थीं। अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली महिला कल्पना चावला को आज भी लोग उनकी उपलब्धियों के लिए याद करते हैं। वह कोलंबिया अंतरिक्ष यान क्रैश में मारे गए सात यात्रियों के दल के सदस्यों में शामिल थीं।
सुनीता विलियम्स
भारतीय मूल की महिला सुनीता विलियम्स दुनियाभर में अलग पहचान रखती हैं। वह एक एस्ट्रोनॉट हैं और अमेरिका नौसेना में अधिकारी भी हैं। उनका नाम सबसे ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में चहलकदमी करने का रिकॉर्ड है। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के रहने वाले थे। बता दें कि वह न्यूरो एनाटॉमिस्ट थे और उनकी मां उर्सुलाइन बोनी पंड्या एक स्लोवेनियाई अमेरिकी थीं। उनके पिता ने साल 1958 में अमेरिका जाकर बसने का फैसला किया। सुनीता विलियम्स ने अपना ग्रेजुएशन नीधम हाई स्कूल से किया था। अमेरिकी नौसेना में भर्ती होने के बाद वह 1998 में एस्ट्रोनॉट के रूप में नियुक्त हुईं। आज उनका नाम दुनिया के हर कोने में जाना जाता है।
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कमला हैरिस
अमेरिकी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाली कमला हैरिस भारतीय मूल की महिला हैं। उनका जन्म 1964 में हुआ था। वर्तमान में वह अमेरिकी सीनेट में शामिल होने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हैं। वह साल 2016 में पहली बार डेमोक्रेटिक पार्टी से सीनेट सदस्य बनीं और सीनेट में कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व भी किया। इससे पहले वह राज्य की अटॉर्नी जनरल भी रही हैं। हाल ही में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार भी रही हैं। उनका नाम दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
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प्रियंका राधाकृष्णन
प्रियंका भारतीय मूल की पहली महिला हैं जिन्होंने न्यूजीलैंड की कैबिनेट में मंत्री पद हासिल किया है। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। प्रियंका ने साल 2017 में लेबर पार्टी से चुनाव जीतकर विदेशी संसद में पहुंचकर भारत का नाम रोशन किया। राजनीति में उनका करियर बहुत ही सक्रिय रहा है। उन्होंने घरेलू हिंसा और प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत काम किया है। वह साल 2006 में पहली बार लेबर पार्टी में शामिल हुईं थीं। उनका जन्म 1979 को चेन्नई में केरल के परावूर परिवार में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा सिंगापुर में हुई और उसके बाद वह हायर एजुकेशन न्यूजीलैंड से की।
निक्की हेली
निम्रता कौर रंधावा या निक्की हेली का जन्म पंजाब के भारतीय अप्रवासी माता-पिता के यहां हुआ था। उन्होंने क्लेम्सन यूनिवर्सिटी से अकाउंटिंग में अपनी डिग्री पूरी की और रिपब्लिकन बैनर के तहत दक्षिण कैरोलिना की गर्वनरशिप संभालने वाली पहली महिला बनीं हैं। 2018 में इस्तीफा देने से पहले वह संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप की उम्मीदवारी के दौरान उनकी अमेरिकी राजदूत भी थीं।
