ट्रंप का अगला निशाना ग्रीनलैंड? NATO में मचा घमासान, डेनमार्क ने दी महायुद्ध की चेतावनी!
Donald Trump NATO: वेनेजुएला के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप के रडार पर NATO है। ग्रीनलैंड को हथियाने की जिद और रक्षा बजट पर विवाद ने दुनिया के सबसे मजबूत सैन्य संगठन के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
वेनेजुएला के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप के रडार पर NATO पर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Denmark Greenland News In Hindi: वेनेजुएला में अमेरिकी सैनिकों की कार्रवाई के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि खनिजों से भरपूर ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और वे 20 दिनों के भीतर इस पर बात करेंगे। ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की इच्छा जताते रहे हैं लेकिन इस बार उनके तेवर अधिक आक्रामक हैं।
डेनमार्क की ‘आर-पार’ की चेतावनी
चूंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त हिस्सा है इसलिए ट्रंप की इस धमकी पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने किसी भी नाटो सदस्य देश पर सैन्य हमला किया, तो यह ‘नाटो के अंत की शुरुआत’ होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी पूरी वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।
आर्टिकल 5 का उल्लंघन?
नाटो (NATO) का मूल सिद्धांत ‘आर्टिकल 5’ है, जिसके अनुसार किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। यदि ट्रंप ग्रीनलैंड को जबरन अमेरिका में मिलाने की कोशिश करते हैं, तो यह नाटो के चार्टर का सीधा उल्लंघन होगा। नॉर्डिक देशों और ब्रिटेन ने भी ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करते हुए डेनमार्क के साथ खड़े होने के संकेत दिए हैं।
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अमेरिका में भी उठ रहे हैं नाटो से अलग होने के सुर
सिर्फ बाहरी ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी नाटो के खिलाफ बगावत शुरू हो गई है। रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने दिसंबर 2025 में संसद में एक बिल पेश किया है, जिसमें अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि शीत युद्ध खत्म होने के बाद नाटो अब अमेरिका पर केवल एक वित्तीय बोझ बनकर रह गया है।
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बजट को लेकर तकरार
ट्रंप की नाटो से चिढ़ का एक बड़ा कारण पैसा भी है। नाटो के कुल रक्षा बजट में अमेरिका अकेले 16 प्रतिशत का योगदान देता है। ट्रंप ने मांग की है कि बाकी सदस्य देश अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करें, जिसे कई यूरोपीय देशों ने अव्यवहारिक और अत्यधिक बताया है। इन्हीं तनावों के बीच अब सवाल उठ रहा है कि क्या दुनिया का सबसे पुराना सैन्य गठबंधन बिखरने की कगार पर है।
