आखिर क्या रही वो वजह? जिसकी भेंट चढ़ गई पाक-अफगान की तीसरी शांता वार्ता… यहां जानें सब कुछ
Afghanistan Pakistan Talks: कतर और तुर्किए की मध्यस्थता के बावजूद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तीसरे दौर की शांति वार्ता नाकाम रही। कंधार में हुई झड़प और पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के आक्रामक...
- Written By: अमन उपाध्याय
पाक-अफगान के बीच तीसरी शांता वार्ता, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
Afghanistan Pakistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में बढ़ती खाई को पाटने की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। तीसरे दौर की शांति वार्ता भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। दोनों देशों के बीच कंधार प्रांत में हालिया झड़प के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि एक बार फिर सीमित युद्ध या बड़ा संघर्ष भड़क सकता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ लगातार अफगानिस्तान को खुली धमकियां दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर तालिबान सरकार सीमा पार से होने वाले हमलों को नहीं रोकती, तो पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा। वहीं, अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद के इस रवैये को उसकी संप्रभुता में दखल करार दिया है।
कतर-तुर्किए की कोशिशें बेअसर
कतर और तुर्किए ने दोनों देशों के बीच तीन दौर की वार्ता करवाई, लेकिन हर बार असहमति गहराती चली गई। इस्तांबुल में हुई बैठक से पहले ही दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी थी। पाक रक्षा मंत्री आसिफ ने तालिबान सरकार की बातचीत करने की क्षमता पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने काबुल की नीतियों के पीछे भारत की भूमिका बताकर तनाव को और बढ़ा दिया।
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वार्ता खत्म होने के बाद आसिफ ने पाकिस्तानी मीडिया से कहा कि अफगान प्रतिनिधिमंडल बिना किसी ठोस एजेंडे के आया था और किसी समझौते पर दस्तखत नहीं किए गए।
मूल विवाद: आतंकवाद और सीमा सुरक्षा
इस्लामाबाद चाहता है कि अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उससे जुड़े नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाए। पाकिस्तान इसके लिए एक लिखित समझौता और तीसरे पक्ष के वेरिफिकेशन मैकेनिज्म की मांग कर रहा है।
वहीं, तालिबान ने इसे अपनी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया है। उनका कहना है कि सुरक्षा कार्रवाई अफगान कानून और संप्रभुता के तहत ही होगी। तालिबान ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “काबुल इस्लामाबाद का पुलिस एजेंट नहीं बनेगा।”
अफगान शरणार्थी मुद्दा भी बाधा बना
तनाव की एक और बड़ी वजह है पाकिस्तान में मौजूद लाखों अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने हजारों अफगानों को अपनी सीमा से बाहर निकाल दिया है, जिससे तालिबान सरकार पर भारी दबाव है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की अपील के बावजूद इस्लामाबाद अपने रुख में नरमी नहीं दिखा रहा।
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कतर और तुर्किए ने इस असफल वार्ता पर निराशा जताई है। दोनों देशों का कहना है कि अगर संवाद बहाल नहीं हुआ, तो क्षेत्र में एक और सशस्त्र संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
