नेपाल फ्लैग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Emergency Team For Nepal Citizens: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी और पड़ोसी देश नेपाल भी इससे अछूता नहीं रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद भड़की हिंसा और मिसाइल हमलों ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नेपाल सरकार ने एक महत्वपूर्ण आपातकालीन राहत दल का गठन करने का फैसला किया है। इस मुश्किल घड़ी में हर देश अपनी रणनीति तैयार कर रहा है ताकि युद्ध की इस तपिश से अपने लोगों को बचा सके।
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच नेपाल सरकार ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कमर कस ली है। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन और शांति बनाए रखने की अपील की है। नेपाल का मानना है कि मतभेदों को केवल कूटनीति और संवाद के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
नेपाल सरकार ने विदेश सचिव अमृत बहादुर राय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आपात राहत दल का गठन किया है जो हर स्थिति पर नजर रखेगा। यह दल पश्चिम एशिया में युद्ध की बदलती स्थितियों के आधार पर एक व्यापक राहत रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य संपन्न करेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में खाड़ी देशों में रहने वाले उनके सभी नागरिक पूरी तरह सुरक्षित और निरंतर संपर्क में हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने ‘ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4’ के तहत बड़े हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सैन्य अड्डों के साथ-साथ कई खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और खतरनाक ड्रोन दागे हैं। कुवैत में अमेरिकी एयर बेस पर हमले हुए हैं और दुबई जैसे बड़े शहरों में धमाकों की गूंज से अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है ताकि इस युद्ध को और अधिक फैलने से रोका जा सके। मंत्रालय ने ‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ को कायम रखने पर जोर देते हुए कहा है कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। नेपाल का यह कदम दिखाता है कि युद्ध के मुहाने पर खड़े इस क्षेत्र के प्रति पड़ोसी देश कितने गंभीर और सजग हैं।
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नेपाल का आपात राहत दल खाड़ी देशों में काम कर रहे अपने नागरिकों के लिए हेल्पलाइन और विशेष सूचना केंद्र स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। युद्ध की स्थिति में फंसे लोगों को निकालने या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना पर भी विशेषज्ञों की टीम गंभीरता से चर्चा कर रही है। सरकार की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि विदेशी धरती पर रहने वाले हर नेपाली नागरिक की जान उनके लिए कितनी अनमोल और महत्वपूर्ण है।