साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर हमला (सोर्स-सोशल मीडिया)
International Military Response To West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है जिससे मानवता पर गहरा संकट मंडरा रहा है। साइप्रस स्थित ब्रिटिश सैन्य ठिकाने पर हुए ताजा ड्रोन हमले ने यूरोपीय देशों की नींद उड़ा दी है और वे अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने अपने सबसे घातक युद्धपोत और लड़ाकू विमानों को भूमध्यसागर की ओर रवाना करने का बड़ा फैसला लिया है। इन बिगड़ते हालातों के बीच दुनिया भर के लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस विनाशकारी युद्ध को रोका जा सके।
पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का प्रभाव अब भूमध्यसागर तक पहुंच गया है जहां साइप्रस के अक्रोटिरी स्थित ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स बेस पर रात में ड्रोन हमला हुआ है। इस हमले के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कड़ा रुख अपनाते हुए रक्षात्मक कार्रवाई के लिए ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। ब्रिटेन ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए एचएमएस ड्रैगन नामक एयर डिफेंस डेस्ट्रॉयर और वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात कर दिए हैं जो महज दस सेकंड में आठ मिसाइलें दाग सकता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपना प्रमुख विमानवाहक पोत ‘शार्ल द गॉल’ तुरंत भूमध्यसागर भेजने का कड़ा आदेश जारी किया है। फ्रांस की ओर से फ्रिगेट लैंगेडॉक और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियां भी साइप्रस के आसपास के क्षेत्रों में तैनात की जा रही हैं ताकि किसी भी हवाई हमले का करारा जवाब दिया जा सके। वहीं ग्रीस ने भी अपने दो युद्धपोत और चार एफ-16 विमान भेजकर साइप्रस की सुरक्षा बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संसद में घोषणा की है कि वे क्षेत्र में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए जरूरी सैन्य संसाधन भेज रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना के सी-17ए ग्लोबमास्टर और केसी-30ए टैंकर विमानों को सहायता और परिवहन कार्यों के लिए विशेष रूप से तैनात किया जा रहा है। इन विमानों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों से मासूम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और मानवीय सहायता पहुंचाना है ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
पश्चिम एशिया की इस भीषण जंग का असर अब केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं जिससे भारत जैसे देशों के व्यापारिक हितों और तेल की सप्लाई पर बुरा प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका है। इजरायल ने भी तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए हैं जिससे स्थिति और अधिक अनियंत्रित होती जा रही है और शांति की उम्मीदें अब धुंधली पड़ रही हैं।
यह भी पढ़ें: US-ईरान जंग के चलते भारत के बंदरगाह जाम! नहीं खत्म हुआ युद्ध तो होगी परेशानी, करोड़ों का माल समुद्र में फंसा
मिडिल ईस्ट के तनाव की आंच अब पाकिस्तान तक पहुंच गई है जहां खामेनेई की मौत के विरोध में प्रदर्शन कर रहे शिया समुदाय पर वहां की सेना ने गोलियां चलाईं। इस गोलीबारी में 38 लोगों की मौत हो चुकी है जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने कई सरकारी दफ्तरों और सैन्य आवासों में आग लगाकर भारी तबाही मचाई है। पाकिस्तान के कई शहरों में अब गृहयुद्ध जैसा माहौल है और लोग सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं जिससे पूरी सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।