Maritime Crisis: पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर भीषण हमले, 17 जहाजों को बनाया गया निशाना, एक भारतीय की मौत
Shipping Route Attacks: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पिछले दो हफ्तों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में 17 जहाजों पर हमले हुए, जिससे वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा खतरे में है।
- Written By: प्रिया सिंह
पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर भीषण हमले (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Trade Impact Conflict: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब समुद्री मार्गों पर कहर बरपा रहा है जिससे दुनिया भर में सुरक्षा और व्यापार को लेकर भारी चिंता का माहौल पैदा हो गया है। पिछले दो हफ्तों के भीतर फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों पर कई हिंसक हमले अंजाम दिए गए हैं। इन हमलों में अब तक कम से कम 17 जहाजों को निशाना बनाया गया है जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और माल ढुलाई की पूरी प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन गतिविधियों और मिसाइल प्रहारों ने इस पूरे समुद्री क्षेत्र को जहाजों की आवाजाही के लिए अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक बना दिया है।
हमलों का भयावह सिलसिला
मार्च के पहले पखवाड़े में फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में विभिन्न व्यापारिक जहाजों पर प्रोजेक्टाइल और विस्फोटक हमले दर्ज किए गए हैं। इन हमलों की शुरुआत में ही 1 मार्च को ओमान की खाड़ी में एमकेडी व्योम (MKD VYOM) नामक टैंकर पर हुए प्रहार में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई। इसके बाद से लगातार हो रही ड्रोन गतिविधियों और रहस्यमयी विस्फोटों ने इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों को लगभग ठप होने की कगार पर पहुंचा दिया है।
प्रमुख समुद्री मार्ग प्रभावित
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में जो ऐतिहासिक गिरावट आई है वह वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की आपूर्ति के लिए एक बड़ी खतरे की घंटी है। आंकड़ों के अनुसार जहां पहले रोजाना लगभग 138 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे वहीं अब यह संख्या नाटकीय रूप से घटकर केवल 2 जहाज प्रतिदिन रह गई है। अब हमले केवल पश्चिमी देशों के जहाजों तक सीमित नहीं हैं बल्कि अब सभी देशों के मालवाहक और कंटेनर जहाजों को बिना किसी भेदभाव के निशाना बनाया जा रहा है।
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नेविगेशन और तकनीकी बाधाएं
युद्ध के भीषण माहौल के बीच समुद्री क्षेत्र में जीपीएस जामिंग और स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक बाधाएं भी बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जो नेविगेशन को मुश्किल बना रही हैं। तकनीकी गड़बड़ियों के कारण जहाजों के सिस्टम उनकी लोकेशन गलत दिखा रहे हैं और कई बार जहाज जमीन पर या असंभव गति से चलते दर्ज हो रहे हैं। जीएनएसएस डेटा के अनुसार जहाज 30 नॉट्स से ज्यादा की गति से चलते दिखाई दे रहे हैं जिससे समुद्र में जहाजों के बीच टक्कर होने का खतरा बढ़ गया है।
आर्थिक प्रभाव और संकट
समुद्री क्षेत्र में बढ़ते इन गंभीर खतरों के कारण युद्ध-जोखिम बीमा की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है जिससे शिपिंग कंपनियों के लिए परिचालन लागत काफी बढ़ गई है। माल ढुलाई की दरें और बंकर ईंधन की कीमतें आसमान छूने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और उर्वरक जैसे आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह प्रभावित हुई है। फुजैरा ऑयल टर्मिनल जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों और ईंधन सुविधाओं पर हुए हमलों ने आने वाले समय में वैश्विक तेल आपूर्ति पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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चालक दल के लिए सुरक्षा निर्देश
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने जहाजों के चालक दलों को अत्यधिक सतर्क रहने और अपने मार्ग को किसी भी निश्चित पैटर्न में न रखने की सख्त सलाह दी है। उन्हें संदिग्ध मिसाइल मलबे से दूर रहने और क्षेत्र में मौजूद सैन्य जहाजों से पर्याप्त दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी दुर्घटना से बचा जा सके। अब जहाजों को लंबे समय तक किसी बंदरगाह पर न रुकने और रडार के साथ-साथ विजुअल संकेतों के माध्यम से नेविगेशन डेटा की मैन्युअल जांच करने को कहा गया है।
