UAE OPEC Exit: यूएई ने छोड़ा OPEC+, लेकिन रूस रहेगा शामिल, बाजार को स्थिर रखने का दावा
UAE OPEC Exit Update: यूएई ने OPEC+ से अलग होने का बड़ा ऐलान किया है। लेकिन रूस इस समूह में बना रहेगा। रूस का मानना है कि वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए यह बहुत जरूरी है।
- Written By: प्रिया सिंह
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (सोर्स-सोशल मीडिया)
UAE OPEC Exit Russia Remains In Global Oil Market: वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक बहुत ही बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने आधिकारिक तौर पर OPEC+ समूह से अलग होने की घोषणा कर दी है। यूएई के इस अचानक लिए गए फैसले से पूरी दुनिया के तेल बाजार में भारी हलचल मच गई है।
यूएई के इस बड़े फैसले के बावजूद रूस ने स्पष्ट किया है कि वह OPEC+ का हिस्सा बना रहेगा। रूस का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के लिए इस समूह का रहना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। यह महत्वपूर्ण जानकारी क्रेमलिन द्वारा दी गई है।
क्रेमलिन का अहम बयान
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने OPEC+ को एक बेहद महत्वपूर्ण संगठन बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा उथल-पुथल के दौर में वैश्विक बाजारों को स्थिर करने में इसकी बड़ी भूमिका है। यह ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव को काफी हद तक कम करता है और स्थिरता लाता है।
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रूस और यूएई के संबंध
पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रूस संयुक्त अरब अमीरात के इस फैसले का पूरी तरह सम्मान करता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि खाड़ी देश के साथ मॉस्को की ऊर्जा वार्ता आगे भी जारी रहेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस साल 2016 में OPEC+ में शामिल हुआ था।
OPEC+ समूह में उत्पादन
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार पिछले साल इस समूह ने दुनिया का 50 प्रतिशत तेल उत्पादन किया था। OPEC+ में यूएई चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश माना जाता था। वहीं रूस का स्थान सऊदी अरब के बाद इस विशाल ऊर्जा समूह में दूसरे नंबर पर आता है।
ट्रंप के लिए बड़ी जीत
यूएई का OPEC+ से बाहर होना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। ट्रंप लंबे समय से इस संगठन पर तेल की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाने का गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। उनका हमेशा से मानना है कि यह समूह ऊंची कीमतों से दुनिया का शोषण करता है।
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अमेरिका और सैन्य समर्थन
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका द्वारा खाड़ी देशों को दिए जाने वाले सैन्य समर्थन को भी तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका स्पष्ट कहना है कि अमेरिका इन ओपेक सदस्य देशों की हमेशा सुरक्षा करता है। जबकि ये सभी देश ऊंची तेल कीमतों के जरिए अमेरिका और दुनिया से भारी लाभ उठाते हैं।
