अमेरिका ने ईरान के ‘करीबी’ को दी खुली धमकी, बोला- सरेंडर करो, नहीं तो…
अमेरिका ने एक बार फिर लेबनान की राजनीतिक और क्षेत्रीय स्थिति में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। उसने नवंबर तक हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने की अंतिम चेतावनी दे दी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
डोनाल्ड ट्रंप, फोटो ( सो.सोशल मीडिया)
वाशिंगटन: अमेरिका ने पहले ईरान को चेतावनी दी और दो दिन के भीतर उसके परमाणु ठिकानों पर जोरदार हमले किए। इसके बाद इजरायल से युद्धविराम करवाया गया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ईरान समर्थक लेबनानी आतंकी संगठन हिज़्बुल्लाह पर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिका ने लेबनान सरकार को 6 पन्नों की शर्तों वाला एक दस्तावेज सौंपा है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यदि नवंबर तक हिज़्बुल्लाह ने हथियार नहीं छोड़े, तो इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी विशेष दूत थॉमस बैरक ने 19 जून को बेरूत की यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव लेबनानी प्रशासन को पेश किया था। इस प्रस्ताव में हिज़्बुल्लाह और अन्य सशस्त्र गुटों को धीरे-धीरे हथियार छोड़ने की योजना शामिल है।
हिज़्बुल्लाह को छोड़ने होंगे हथियार
अमेरिकी प्रस्ताव की मुख्य बातें ये है कि हिज़्बुल्लाह को पूरे लेबनान में अपने हथियार छोड़ने होंगे। इसके बदले में इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान से हट जाएगी। लेबनान सरकार को सीरिया के साथ अपने संबंध बेहतर करने और देश में आर्थिक सुधार लागू करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में इज़रायल की जेलों में बंद हिज़्बुल्लाह समर्थकों की रिहाई का भी प्रस्ताव रखा गया है। अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर इस अवसर को गंवा दिया गया, तो भविष्य में इस तरह का प्रस्ताव दोबारा मिलना मुश्किल होगा।
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नवंबर तक हिज़्बुल्लाह को करना होगा आत्मसमर्पण
बैरक ने स्पष्ट किया है कि नवंबर के अंत तक हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह से अपने हथियार डालने होंगे। तभी अमेरिका लेबनान को पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देगा और इज़रायली हमलों को रोका जाएगा। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका इस प्रस्ताव पर इज़रायल की आधिकारिक स्वीकृति का इंतज़ार कर रहा है, जबकि लेबनानी अधिकारी जल्द ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया भेजने की तैयारी में हैं।
हिज़्बुल्लाह को भारी नुकसान
पिछले साल की लड़ाई में इज़रायली हमलों से हिज़्बुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचा था। संगठन पहले से आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है और लेबनान के भीतर भी उस पर दबाव बढ़ रहा है। अब देखने की बात यह होगी कि वह अमेरिका की इस कड़ी चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।
