अमेरिका ने किया ‘Doomsday’ मिसाइल परीक्षण (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Tests Minuteman-III Missile: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। कैलिफोर्निया के तट से एक ऐसी घातक मिसाइल का परीक्षण किया गया है जिसे दुनिया ‘डूम्सडे’ या कयामत की मिसाइल कह रही है। हालांकि पेंटागन ने इसे एक नियमित परीक्षण बताया है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनियों के बीच इस शक्ति प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है।
अमेरिका की यह मिनटमैन-III मिसाइल 1970 के दशक की सबसे पुरानी लेकिन बेहद भरोसेमंद और ताकतवर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। यह जमीन से लॉन्च होकर करीब 13,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है जो दुश्मन के लिए काल बन सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मिसाइल हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की तुलना में लगभग 20 गुना ज्यादा तबाही मचाने की ताकत रखती है।
अमेरिकी वायु सेना के ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने बताया कि सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग बेस से रात 11 बजे यह सफल लॉन्च किया गया। यह परीक्षण मिसाइल की मारक क्षमता, सटीकता और सिस्टम की तत्परता को परखने के लिए किया गया था ताकि युद्ध के समय कोई कमी न रहे। बिना हथियार वाला यह रॉकेट मार्शल द्वीप के पास अपने तय लक्ष्य पर बिल्कुल सटीक तरीके से गिरा जिससे अमेरिकी सेना की ताकत साबित हुई।
मिडिल ईस्ट में स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद से ही ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है और जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने लेबनान में बमबारी शुरू कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अब ईरान पर हमले और तेज करने की कसम खाई है जिससे यह साफ है कि आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण होंगे।
मिसाइल परीक्षण को नियमित बताए जाने के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। अमेरिका के पास वर्तमान में लगभग 400 ऐसी मिसाइलें मौजूद हैं जो उसकी परमाणु त्रिकोण सुरक्षा व्यवस्था का एक बहुत ही अनिवार्य और मजबूत हिस्सा हैं। दुनिया भर के शांति प्रेमी लोग अब इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं यह होड़ एक महाविनाशकारी परमाणु युद्ध में न बदल जाए।
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युद्ध की इस आग के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक स्तर पर हवाई सफर भी काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। भारत में भी करीब 180 उड़ानें कैंसिल हो चुकी हैं और दुबई जैसे व्यापारिक केंद्रों के रियल एस्टेट मार्केट पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। लोग अब केवल यही दुआ कर रहे हैं कि कूटनीति के जरिए इस मसले को सुलझाया जाए ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके।